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Report by: Ishu Kumar

Bakloh : देश की रक्षा का संकल्प लेकर भारतीय सेना में शामिल हुए 26 वर्षीय जांबाज जवान मोहित अब हमारे बीच नहीं रहे। हिमाचल प्रदेश के चंबा स्थित बकलोह सैन्य छावनी में प्रशिक्षण के दौरान शहीद हुए मोहित का उनके पैतृक गांव साहूपुरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। तिरंगे में लिपटे पार्थिव देह के गांव पहुँचते ही ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, मोहित तेरा नाम रहेगा’ के नारों से आसमान गूंज उठा। बड़े भाई ने भारी मन से चिता को मुखाग्नि दी, जिसे देख वहां मौजूद हर शख्स की आंख नम हो गई।

Bakloh प्रशिक्षण के दौरान हुआ हादसा: देश ने खोया होनहार जवान

शहीद मोहित भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 29 पैरा यूनिट (स्पेशल फोर्सेस) का हिस्सा थे और वर्तमान में उनकी तैनाती आगरा में थी। करीब 40 दिन पहले उन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए चंबा के बकलोह स्थित स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल भेजा गया था। 18 अप्रैल को बॉक्सिंग अभ्यास के दौरान मोहित के सिर पर गंभीर चोट लग गई। उन्हें तत्काल सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन रविवार को उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। मोहित के जाने की खबर ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरी सैन्य छावनी को शोक में डुबो दिया।

Bakloh तीन महीने पहले ही रचाई थी शादी, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मोहित की शहादत की खबर उनके परिवार के लिए वज्रपात जैसी है। महज तीन महीने पहले, फरवरी में ही मोहित की शादी बड़े धूमधाम से हुई थी। उनके हाथों की मेहंदी का रंग अभी फीका भी नहीं पड़ा था कि खुशियों वाले घर में मातम छा गया। तीन भाइयों में सबसे छोटे मोहित बचपन से ही सेना में जाने का जुनून रखते थे। उनके एक भाई सरकारी अधिकारी हैं और दूसरे निजी क्षेत्र में, लेकिन मोहित ने वतन की सेवा के लिए कठिन रास्ता चुना था। उनकी शहादत पर परिजनों ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, जिसने अपनी अंतिम सांस तक कर्तव्य का निर्वहन किया।

Bakloh राजकीय सम्मान और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

वीर जवान की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर और बल्लभगढ़ के विधायक मूलचंद शर्मा सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने शहीद के घर पहुँचकर शोक व्यक्त किया और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। सेना की टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। नेताओं ने आश्वासन दिया कि शहीद के परिवार की हर संभव मदद की जाएगी और उनकी इस शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा। मोहित करीब 8 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे और अपनी बहादुरी के लिए यूनिट में लोकप्रिय थे।

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