रिपोर्टर: आलोक भारद्वाज
Bhind : मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोहद जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत शेरपुर में सरकारी राशि के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां पंचायत स्तर पर नियमों को ताक पर रखकर महंगे दामों पर कचरा वाहन खरीदे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मनमाने दामों पर कचरा वाहन की खरीदी
Bhind ग्राम पंचायत शेरपुर में सरपंच और सचिव द्वारा वित्तीय नियमों को दरकिनार कर भ्रष्टाचार का एक नया तरीका इजाजत किया गया है। बाजार में जिस कचरा वाहन की वास्तविक कीमत लगभग 8 लाख रुपए है, उसे पंचायत द्वारा दस्तावेजों में हेरफेर कर ₹13,60,000 (तेरह लाख साठ हजार रुपए) की अत्यधिक कीमत पर खरीदा गया है। तय कीमत से करीब 5.60 लाख रुपए अधिक का भुगतान कर सरकारी धन को खुलेआम चूना लगाया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश व्याप्त है।
जनप्रतिनिधि की उच्च स्तरीय शिकायत
Bhind इस वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ गोहद जनपद पंचायत के अध्यक्ष कालीचरण तोमर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जनपद स्तर से लेकर सीधे जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक दर्ज कराई है। जनपद अध्यक्ष ने मांग की है कि इस अवैध खरीद-फरोख्त की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले दोषी सरपंच व सचिव के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक अधिकारियों के पल्ला झाड़ने वाले बयान
Bhind मामले के तूल पकड़ने के बाद जब मीडिया और उच्च स्तर से गोहद जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) से इस संबंध में पक्ष जानना चाहा, तो उनका अजीब बयान सामने आया। सीईओ का कहना है कि नियमानुसार पांचवें वित्त आयोग (5th Finance Commission) की राशि से इस प्रकार की वस्तुएं या वाहन नहीं खरीदे जा सकते हैं। यदि नियमों के विरुद्ध जाकर यह खरीदी की गई है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनुशासनहीनता को साबित करता है।

