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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Balaghat : मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से सामाजिक बदलाव और स्वास्थ्य सेवा की एक मिसाल सामने आई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के विशेष अभियान के तहत वर्ष 2025 में नक्सलवाद के कुचक्र से पूरी तरह मुक्त हुए अति-संवेदनशील बिरसा विकासखंड के सुदूर गांवों में आजादी के बाद पहली बार सरकारी स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहुंच रही हैं। दशकों से नक्सलियों द्वारा आदिवासियों में फैलाए गए डर और भ्रांतियों को तोड़ते हुए डॉक्टरों की टीम ने एक अज्ञात व जानलेवा बीमारी से पीड़ित 125 से अधिक मासूम बच्चों की जान बचाने में अभूतपूर्व सफलता पाई है।

Balaghat चार दशकों का डर और आदिवासियों के माइंडसेट को बदलने की चुनौती

वर्ष 1986 से नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहे बिरसा ब्लॉक के बोंदारी, अडोरी, कुंडेकसा, कोरका और मछुरदा जैसे गांवों में सुरक्षा बलों या डॉक्टरों की यूनिफॉर्म देखते ही लोग जंगलों की ओर भाग जाते थे। नक्सलियों ने ग्रामीणों का इस कदर माइंडसेट प्रभावित किया था कि वे बीमारी में भी कभी अस्पताल नहीं जाते थे। आज भी इस क्षेत्र में पुराना खौफ पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, लेकिन जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार घर-घर जाकर चौपाल लगा रही हैं तथा ग्रामीणों को मुख्यधारा और चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने का निरंतर प्रयास कर रही हैं।

Balaghat पहली बार तैयार हो रहा हेल्थ डेटा, 169 बच्चे अस्पताल में भर्ती

जून 2026 में तेज बुखार, शरीर पर चकत्ते, मुंह में छाले और उल्टी-दस्त के लक्षणों के साथ एक बच्चे की मौत के बाद मेडिकल टीम सतर्क हुई। पहली बार इस क्षेत्र का औपचारिक मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:

  • अस्पताल में भर्ती: पिछले एक महीने में 169 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • सफल डिस्चार्ज: गहन चिकित्सा देखभाल के बाद 125 बच्चे पूरी तरह ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं।
  • गृह उपचार: 20 सर्वेक्षण टीमों के माध्यम से घर-घर जाकर 461 बच्चों का उनके निवास स्थान पर ही इलाज किया गया।

10 गांवों के 980 घरों में फैलाया गया स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

प्रशासन ने इलाके में चिकित्सा व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए 10 चिकित्सा अधिकारियों, 4 एम्बुलेंस और पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट्स को तैनात किया है। कुंडेकसा, बोंदारी और अडोरी सहित 10 गांवों के 980 घरों का व्यापक सर्वे कर 658 बच्चों को विटामिन-ए, ओआरएस व जिंक टैबलेट्स दी गईं, जबकि 63 बच्चों का खसरा टीकाकरण किया गया। इसके अलावा, मौसमी व संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए कीटनाशक छिड़काव और एंटी-लार्वा फॉगिंग का काम भी युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।

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