Adhik Maas Pradosha Katha : सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ और प्रभावशाली व्रत माना गया है। हर माह की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत इस बार अधिक मास में पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। 28 मई 2026 को गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा और व्रत कथा का श्रवण करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
Adhik Maas Pradosha Katha गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव के साथ-साथ पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन प्रदोष काल में शिव परिवार की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखकर शिव कथा सुनते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन के संकट दूर होते हैं और सफलता के मार्ग खुलते हैं।
Adhik Maas Pradosha Katha गुरु प्रदोष व्रत की पावन कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय देवताओं और वृत्रासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्यों की सेना को पराजित कर दिया, लेकिन इससे क्रोधित होकर वृत्रासुर स्वयं युद्धभूमि में उतर आया। उसने अपनी मायावी शक्तियों से विकराल रूप धारण कर देवताओं को भयभीत कर दिया।
डरे हुए देवता देवगुरु बृहस्पति के पास पहुंचे और सहायता की प्रार्थना की। तब बृहस्पति ने उन्हें वृत्रासुर के पूर्व जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि वृत्रासुर अपने पिछले जन्म में चित्ररथ नाम का एक राजा था, जो भगवान शिव का परम भक्त था।
एक बार चित्ररथ कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के दर्शन करने पहुंचा। वहां उसने भगवान शिव को माता पार्वती के साथ विराजमान देखा। अहंकारवश उसने सभा में अनुचित टिप्पणी कर दी। उसके शब्द सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो गईं और उन्होंने चित्ररथ को राक्षस योनि में जन्म लेने का शाप दे दिया।
माता के श्राप के कारण चित्ररथ अगले जन्म में वृत्रासुर बना। हालांकि राक्षस योनि में जन्म लेने के बाद भी उसकी शिव भक्ति कम नहीं हुई। वह तप और भक्ति में लीन रहा।
देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र से कहा कि यदि वे भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उन्हें गुरु प्रदोष व्रत करना चाहिए। इंद्र ने श्रद्धा और विधि-विधान से प्रदोष व्रत किया। भगवान शिव की कृपा से उन्हें शक्ति प्राप्त हुई और अंततः उन्होंने वृत्रासुर पर विजय हासिल की।
Adhik Maas Pradosha Katha प्रदोष व्रत में क्या करें?
- प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें
- शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें
- ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें
- व्रत कथा का श्रवण अवश्य करें
- जरूरतमंदों को दान दें
अधिक मास का पहला गुरु प्रदोष व्रत भक्तों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना और कथा का पाठ करने से जीवन के दुख दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शिव कृपा से सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक आस्थाओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
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