by-Ravindra Sikarwar
काठमांडू/तेल अवीव: नेपाली छात्र बिपिन जोशी, जो हमास की हिरासत में एकमात्र हिंदू बंधक थे, की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। 23 वर्षीय जोशी को 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले के दौरान अगवा किया गया था, और वे 738 दिनों तक बंधक रहे। उनके शव को हमास ने इजरायली अधिकारियों को सौंप दिया है, जो अब तेल अवीव ले जाया जा रहा है। यह खबर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में चल रही गाजा शांति योजना के दौरान सामने आई, जहां हमास ने 20 जीवित बंधकों को रिहा किया, लेकिन जोशी सहित चार बंधकों के शव लौटाए। जोशी की मौत ने उनके परिवार की दो साल की उम्मीदों को तोड़ दिया है, जो लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे थे। नेपाली सरकार ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शव की वापसी के लिए इजरायल के साथ समन्वय कर रही है।
घटना का विवरण: इजरायल में अध्ययन के लिए गए थे जोशी
बिपिन जोशी नेपाल के कानचनपुर जिले के एक साधारण परिवार से थे। वे कृषि विज्ञान में स्नातक कर रहे थे और इजरायल के ‘लर्न एंड अर्न’ कार्यक्रम के तहत अध्ययन और काम करने के लिए वहां गए थे। जोशी 10 सितंबर 2023 को इजरायल पहुंचे थे, यानी हमले से महज 25-30 दिन पहले। वे किबुत्ज़ अलुमिम में रह रहे थे, जहां वे कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण ले रहे थे। 7 अक्टूबर को हमास के आतंकवादियों ने इजरायल पर बड़े पैमाने पर हमला किया, जिसमें 1,200 से अधिक लोग मारे गए और 250 से ज्यादा को बंधक बनाया गया। जोशी उन 10 नेपाली छात्रों में से एक थे, जिन्हें अगवा किया गया। हमले के दौरान जोशी ने बहादुरी दिखाई—उन्होंने हमलावरों द्वारा फेंके गए ग्रेनेड को वापस फेंका, जिससे कई साथियों की जान बची। हालांकि, इस प्रयास में वे खुद घायल हो गए और अगवा कर लिए गए।
हमास ने जोशी सहित कई बंधकों को गाजा में सुरंगों और अन्य छिपे हुए स्थानों में रखा। जोशी एकमात्र नेपाली थे जो जीवित बचे थे, जबकि हमले में 10 नेपाली छात्र मारे गए थे। वे हमास की हिरासत में एकमात्र हिंदू बंधक थे, जिस कारण उनकी स्थिति विशेष रूप से चर्चा में रही। नेपाली समुदाय और हिंदू संगठनों ने उनकी रिहाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया। जोशी की मां और परिवार ने कई बार नेपाल सरकार और संयुक्त राष्ट्र से अपील की, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
मौत की पुष्टि और शव की वापसी:
13 अक्टूबर 2025 को हमास ने गाजा शांति समझौते के तहत 20 जीवित बंधकों को रेड क्रॉस के माध्यम से रिहा किया। इसी दौरान, जोशी सहित चार बंधकों—जिनमें तीन इजरायली नागरिक शामिल हैं—के शव इजरायली अधिकारियों को सौंपे गए। नेपाली दूतावास के अधिकारी पंडित ने कहा, “जोशी का शव हमास द्वारा इजरायली अधिकारियों को सौंप दिया गया है और इसे तेल अवीव ले जाया जा रहा है।” मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, जोशी की मौत कैद के दौरान की कठिन परिस्थितियों या चोटों के कारण हो सकती है। हमास ने दावा किया कि जोशी की मौत समझौते से पहले हो चुकी थी।
नेपाल सरकार ने इसकी पुष्टि की और कहा कि शव को नेपाल लाने के लिए इजरायल के साथ बातचीत चल रही है। जोशी के परिवार को सूचित कर दिया गया है, जो इस खबर से सदमे में हैं। उनके पिता ने कहा, “हम दो साल से इंतजार कर रहे थे, लेकिन यह अंत हमारी उम्मीदों को तोड़ने वाला है। बिपिन एक बहादुर बेटा था।” नेपाल में जोशी की रिहाई के लिए चलाए गए अभियान अब शोक में बदल गए हैं।
गाजा शांति योजना का संदर्भ:
यह घटना ट्रंप की मध्यस्थता में चल रही गाजा शांति योजना के दौरान हुई। योजना के पहले चरण में हमास ने 20 जीवित बंधकों को रिहा किया, जबकि इजरायल ने सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को मुक्त किया। जोशी की मौत की पुष्टि इस योजना को गति देने वाली है, लेकिन यह नेपाली समुदाय के लिए दुखद साबित हुई। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जोशी की मौत पर शोक व्यक्त किया है और बंधकों की रिहाई की प्रक्रिया को तेज करने की मांग की है।
परिवार और समाज पर प्रभाव:
जोशी के परिवार ने दो साल तक उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थनाएं कीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपील की। नेपाल में हिंदू समुदाय ने उन्हें एक प्रतीक के रूप में देखा, क्योंकि वे कैद में एकमात्र हिंदू थे। उनकी मौत ने नेपाल-इजरायल संबंधों पर भी असर डाला है, जहां नेपाली छात्रों के लिए सुरक्षा उपायों पर चर्चा हो रही है। नेपाली विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे इजरायल से सभी नेपाली नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं।
यह घटना गाजा संकट की मानवीय त्रासदी को उजागर करती है, जहां निर्दोष नागरिकों की जानें गईं। जोशी की कहानी बहादुरी और दुख की मिसाल बनी रहेगी, और उनके परिवार को अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत है। नेपाली सरकार ने शव की वापसी के बाद अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने का वादा किया है।
