by-Ravindra Sikarwar
लाहौर: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में फिलिस्तीन के समर्थन में आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक पुलिस अधिकारी, तीन प्रदर्शनकारी और एक राहगीर शामिल हैं। यह घटना रविवार को मुरिदके शहर में हुई, जहां कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन तहरीक-ए-लबीक पाकिस्तान (टीएलपी) के समर्थक इस्लामाबाद की ओर लंबी यात्रा पर निकले थे। प्रदर्शनकारियों ने इज़राइल की गाजा नीतियों के खिलाफ नारे लगाए, जबकि पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। झड़पें तीन घंटे से अधिक चलीं, जिसमें 40 से ज्यादा वाहनों को आग लगा दी गई।
घटना की पूरी जानकारी:
टीएलपी ने शुक्रवार को लाहौर से शुरू की गई इस “गाजा मार्च” को फिलिस्तीनियों के प्रति एकजुटता का प्रतीक बताया था। यह मार्च ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रंक रोड से गुजरते हुए लगभग 400 किलोमीटर दूर राजधानी इस्लामाबाद तक पहुंचने वाला था, जहां संगठन अमेरिकी दूतावास के बाहर प्रदर्शन की योजना बना रहा था। मार्च में हजारों समर्थक लाठियां, ईंटें और डंडे लेकर शामिल हुए, जो धार्मिक नारों के साथ इज़राइल-विरोधी मांगें कर रहे थे।
रविवार को मुरिदके में स्थिति तब बिगड़ी जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के कैंप को घेर लिया। पंजाब पुलिस प्रमुख उस्मान अनवर के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें एक स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) की मौत हो गई और कई अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए। जवाब में पुलिस ने अभियान चलाया, जिसके दौरान तीन टीएलपी कार्यकर्ता और एक स्थानीय राहगीर भी मारे गए। टीएलपी ने दावा किया कि उसके 250 से अधिक सदस्य मारे गए हैं और 1,500 से ज्यादा घायल हुए हैं, हालांकि आधिकारिक आंकड़े इससे कम हैं। संगठन के प्रमुख साद हुसैन रिजवी को कथित तौर पर कई गोलियां लगीं और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
वीडियो फुटेज में दिखा कि प्रदर्शनकारी पुलिस वाहनों पर हमला कर रहे थे, जबकि सुरक्षा बल पाकिस्तान रेंजर्स की मदद से कैंप को सील कर चुके थे। झड़पों के बाद मीडिया को क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। लाहौर पुलिस ने बताया कि शनिवार को ही 100 से अधिक टीएलपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था, जो संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमले के आरोप में हिरासत में हैं।
टीएलपी संगठन और मार्च का उद्देश्य:
तहरीक-ए-लबीक पाकिस्तान एक कट्टर धार्मिक राजनीतिक दल है, जो धार्मिक भावनाओं को भड़काने और सड़क प्रदर्शनों के लिए जाना जाता है। 2021 में इसके पूर्व नेता की गिरफ्तारी के बाद हुए हिंसक विरोध के कारण इसे अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया गया था, लेकिन बाद में प्रतिबंध हटा लिया गया। वर्तमान प्रमुख साद हुसैन रिजवी ने जुमे की नमाज के बाद मार्च का आह्वान किया था, जिसमें उन्होंने कहा, “गिरफ्तारी या गोलियां कोई मायने नहीं रखतीं, शहादत हमारा मुकद्दर है।”
यह प्रदर्शन गाजा में इज़राइल-हमास संघर्ष के संदर्भ में हो रहा है, जो 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से शुरू हुआ था। हमले में लगभग 1,200 इज़राइली मारे गए थे, जबकि इज़राइली जवाबी कार्रवाई में गाजा स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार 67,000 से अधिक फिलिस्तीनी जान गंवा चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते के तहत हमास ने आखिरी 20 जीवित बंधकों को रिहा किया है, लेकिन टीएलपी इसे “पाखंडपूर्ण” बता रहा है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी सरकार इस समझौते का समर्थन करके इज़राइल के साथ गुप्त रूप से सहयोग कर रही है।
सरकारी प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपाय:
पाकिस्तान सरकार ने मार्च को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने चेतावनी दी कि किसी भी समूह को इस्लामाबाद में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। डिप्टी आंतरिक मंत्री तलाल चौधरी ने टीएलपी पर “धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक दुरुपयोग” करने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें 1,200 से अधिक अर्धसैनिक बलों को पंजाब में तैनात करने का फैसला हुआ।
लाहौर और इस्लामाबाद के आसपास सड़कें और मोटरवे फिर से बंद कर दिए गए, जबकि कुछ स्कूलों को जल्दी छुट्टी दे दी गई। खैरियान शहर में जीटी रोड पर खाई खोदी गई, जबकि सराय आलमगीर के झेलम पुल और चिनाब नदी के वजीराबाद किनारे पर अवरोधक लगाए गए। मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं लाहौर के प्रभावित इलाकों में निलंबित रहीं। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने आगजनी और तोड़फोड़ की, जिससे दर्जनों वाहन जल गए।
व्यापक प्रभाव और पृष्ठभूमि:
यह घटना पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में धार्मिक कट्टरवाद की चुनौतियों को उजागर करती है। टीएलपी के प्रदर्शन अक्सर सरकार के लिए सिरदर्द साबित होते हैं, और इस बार यह गाजा संकट से जुड़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, पाकिस्तान ने हमेशा फिलिस्तीन का समर्थन किया है, लेकिन ट्रंप की शांति योजना के प्रति इसकी सहमति ने आलोचना को जन्म दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये झड़पें देश की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर जब आर्थिक संकट पहले से ही गहरा रहा हो।
पुलिस ने मृतकों की पहचान अभी पूरी नहीं की है, लेकिन टीएलपी ने अपने मारे गए सदस्यों को “शहीद” घोषित कर दिया है। सरकार ने शांति बहाल करने का वादा किया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें—इज़राइल को मान्यता न देना और फिलिस्तीन को पूर्ण समर्थन—अभी पूरी नहीं हुई हैं। यह घटना मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया पर वैश्विक नजरें खींच रही है।
