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by-Ravindra Sikarwar

ग्रेटर नोएडा में एक दहेज हत्या का मामला सुर्खियों में बना हुआ है, जिसमें एक 22 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने मृतका की सास और परिवार के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके कारण उसकी जान गई।

मामले का विवरण:
यह घटना ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर थाना क्षेत्र की है। मृतका, जिसका नाम आरती (परिवर्तित नाम) था, की शादी लगभग दो साल पहले राहुल (परिवर्तित नाम) से हुई थी। शादी के बाद से ही, आरती के ससुराल वाले, जिसमें उसकी सास, ससुर, और ननद शामिल थे, कथित तौर पर उससे दहेज की मांग कर रहे थे।

आरती के माता-पिता का आरोप है कि उन्होंने शादी में अपनी क्षमता के अनुसार काफी दहेज दिया था, लेकिन ससुराल वाले एक कार और ₹5 लाख नकद की अतिरिक्त मांग कर रहे थे। यह मांग पूरी न होने पर आरती को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।

पुलिस की कार्रवाई:
पुलिस को सूचना मिली कि आरती ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। घटनास्थल पर पहुंचने पर, पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने मृतका के परिवार की शिकायत के आधार पर दहेज हत्या (धारा 304B) और दहेज उत्पीड़न (धारा 498A) के तहत मामला दर्ज किया।

जांच के बाद, पुलिस ने मृतका की सास को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपी परिवार के सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में गहनता से जांच कर रहे हैं और सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

दहेज विरोधी कानून और समाज पर प्रभाव:
यह घटना एक बार फिर समाज में व्याप्त दहेज प्रथा की बुराई को उजागर करती है। भारतीय कानून में दहेज लेना और देना दोनों ही अपराध हैं। दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के तहत, दहेज लेना या देना दंडनीय अपराध है, और भारतीय दंड संहिता की धारा 304B (दहेज हत्या) के तहत, यदि किसी विवाहिता की शादी के 7 साल के भीतर गैर-प्राकृतिक कारणों से मौत होती है और यह साबित हो जाता है कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था, तो ससुराल वालों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

यह मामला दिखाता है कि दहेज प्रथा आज भी हमारे समाज में एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जिसके कारण कई महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समाज में जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई दोनों की आवश्यकता है।