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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: स्विस बैंकों में भारतीयों का पैसा 2024 में बढ़कर 3.5 बिलियन स्विस फ्रैंक (लगभग ₹37,600 करोड़) हो गया है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग तीन गुना की बड़ी वृद्धि है। यह जानकारी स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक (स्विस नेशनल बैंक – SNB) द्वारा जारी नवीनतम वार्षिक आंकड़ों से सामने आई है। इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा वित्तीय संस्थानों और बैंकिंग चैनलों के माध्यम से जमा किए गए धन से आया है।

आंकड़ों का विश्लेषण: कहाँ से आया यह पैसा?
स्विस नेशनल बैंक (SNB) हर साल उन फंडों का ब्योरा जारी करता है जो विदेशी ग्राहकों के स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा होते हैं। ये आंकड़े सीधे तौर पर “काला धन” का संकेत नहीं देते हैं, क्योंकि इनमें भारतीयों की वैध जमाएँ भी शामिल होती हैं, जैसे कि भारतीय कंपनियों या व्यक्तियों द्वारा वैध व्यावसायिक लेनदेन के तहत रखा गया पैसा। हालांकि, इस तरह की तीव्र वृद्धि अक्सर सार्वजनिक और राजनीतिक बहसों का विषय बन जाती है, खासकर भारत में काले धन को वापस लाने के प्रयासों के संदर्भ में।

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार:

  • कुल जमा में भारी वृद्धि: 2023 के अंत में स्विस बैंकों में भारतीय ग्राहकों का कुल फंड CHF 1.1 बिलियन (लगभग ₹9,000 करोड़) था, जो 2024 में बढ़कर CHF 3.5 बिलियन (लगभग ₹37,600 करोड़) हो गया है। यह लगभग तीन गुना की वृद्धि है।
  • सबसे बड़ा हिस्सा वित्तीय संस्थानों से: इस वृद्धि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा व्यक्तिगत जमा या ग्राहक देनदारियों के बजाय वित्तीय संस्थानों और बैंकिंग चैनलों के माध्यम से रखे गए धन से आया है। इसका मतलब है कि यह पैसा सीधे व्यक्तियों के खातों में नहीं है, बल्कि अन्य बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से स्विस बैंकों में रखा गया है, जो अक्सर व्यावसायिक लेनदेन या निवेश से संबंधित होता है।
  • अन्य मदों में कमी: ग्राहक जमा (Customer Deposits) के रूप में रखे गए धन में मामूली कमी आई है, जबकि बॉन्ड, सिक्योरिटीज और अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से रखे गए धन में वृद्धि देखी गई है।

“काला धन” और पारदर्शिता पर बहस:
भारत में, स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का एक संवेदनशील विषय रहा है। अक्सर इसे “काला धन” या “अवैध रूप से अर्जित धन” के रूप में देखा जाता है, जिसे टैक्स से बचने के लिए या भ्रष्टाचार के माध्यम से अर्जित किया जाता है।

हालांकि, स्विट्जरलैंड लगातार यह तर्क देता रहा है कि उसके बैंकिंग गोपनीयता कानूनों का उपयोग अवैध धन छिपाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। पिछले कुछ वर्षों में, भारत और स्विट्जरलैंड के बीच स्वचालित सूचना विनिमय समझौता (Automatic Exchange of Information – AEOI) लागू हुआ है। इस समझौते के तहत, स्विट्जरलैंड भारत के साथ उन भारतीय खाताधारकों के वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी साझा करता है जिनके खाते 2018 के बाद से खुले हैं या सक्रिय हुए हैं। इस पारदर्शिता समझौते का उद्देश्य काले धन पर अंकुश लगाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AEOI समझौते के बाद, अवैध धन को स्विस बैंकों में सीधे व्यक्तिगत खातों में रखना अधिक कठिन हो गया है। इसलिए, वर्तमान वृद्धि शायद सीधे तौर पर काले धन के बड़े पैमाने पर वापसी को नहीं दर्शाती है, बल्कि यह वैध व्यावसायिक लेनदेन या जटिल वित्तीय संरचनाओं का परिणाम हो सकती है। हालांकि, यह अभी भी जांच का विषय है कि क्या इन लेनदेन में कोई अनियमितता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह:
भारतीय सरकार लगातार काले धन के खिलाफ कार्रवाई करने और उसे वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध रही है। इस तरह के आंकड़ों पर सरकार की करीबी नजर रहती है। यह उम्मीद की जाती है कि भारत स्विट्जरलैंड के साथ अपने सहयोग को जारी रखेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसके नागरिकों द्वारा स्विट्जरलैंड में रखी गई कोई भी अवैध संपत्ति का पता लगाया जा सके और उस पर उचित कार्रवाई की जा सके।

यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय एजेंसियां इन नवीनतम आंकड़ों का कैसे विश्लेषण करती हैं और क्या वे किसी संभावित अनियमितता की जांच के लिए स्विट्जरलैंड से अतिरिक्त जानकारी का अनुरोध करती हैं।

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