
रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के नाम पर मुहर लगाने के लिए नई दिल्ली में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य सरकार द्वारा भेजे गए चार वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों के नामों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक राज्य सरकार को डीपीसी के निर्णय से अवगत करा दिया जाएगा।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में फरवरी माह से अरुण देव गौतम कार्यवाहक डीजीपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। राज्य सरकार ने पूर्णकालिक डीजीपी के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए योग्य आईपीएस अधिकारियों के चार नामों का एक पैनल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजा था। इसी सिलसिले में मंगलवार को नई दिल्ली में डीपीसी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन और राज्य के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) ने भी हिस्सा लिया।
डीजीपी पद के प्रबल दावेदार:
राज्य कैडर के आईपीएस अधिकारियों में डीजीपी पद के लिए चार प्रमुख दावेदार हैं: पवन देव, अरुण देव, जीपी सिंह और हिमांशु गुप्ता। इन सभी अधिकारियों के पास पुलिस सेवा में लंबा और विविध अनुभव है।
दिसंबर में भेजा गया था प्रस्ताव:
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, राज्य के पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा के फरवरी में सेवानिवृत्त होने से पहले ही, राज्य सरकार ने दिसंबर माह में नए डीजीपी के लिए यूपीएससी को प्रस्ताव भेज दिया था। हालांकि, यूपीएससी ने कुछ अतिरिक्त जानकारी की मांग करते हुए फाइल वापस भेज दी थी, जिसे अब पूरा कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री करेंगे अंतिम फैसला:
डीपीसी की बैठक के बाद, यूपीएससी इन चार नामों में से दो से तीन योग्य अधिकारियों की सूची राज्य सरकार को भेजेगी। इस सूची में शामिल किसी भी अधिकारी को मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के पूर्णकालिक डीजीपी के रूप में नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र होंगे। विभागीय सूत्रों की मानें तो अरुण देव गौतम राज्य सरकार की पहली पसंद बने हुए हैं, और ऐसी संभावना है कि वे ही पूर्णकालिक डीजीपी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
