रिपोर्टर: रतन कुमार
Jamtara : झारखंड के जामताड़ा स्थित मैथन डैम में प्रस्तावित सोलर पावर प्रोजेक्ट को लेकर विस्थापितों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को बड़ी संख्या में महिला और पुरुष विस्थापितों ने एकजुट होकर निर्माण स्थल पर उग्र प्रदर्शन किया। हाथों में लाठी, हसुआ, कुल्हाड़ी लेकर और ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने मौके पर चल रहे काम को पूरी तरह बंद करा दिया और वहां खड़े जेसीबी व कंटेनर को भी हटवा दिया।
1953 के विस्थापन का दर्द, आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम
Jamtara विस्थापित अध्यक्ष अकबर अंसारी ने रोष जताते हुए कहा कि दामोदर घाटी निगम (DVC) ने साल 1953 में उनकी जमीन का अधिग्रहण कर उन्हें विस्थापित किया था, लेकिन दशकों बीत जाने के बाद भी उन्हें आज तक उचित मुआवजा, नौकरी और बेहतर पुनर्वास का लाभ नहीं मिला। आज भी ये परिवार बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
“पुनर्वास और मांगों को माने बिना नहीं लगने देंगे प्रोजेक्ट”
Jamtara आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि प्रशासन और डीवीसी अधिकारियों द्वारा सोलर प्रोजेक्ट के नाम पर उन्हें एक बार फिर से उजाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उमेश और मुमताज अंसारी जैसे स्थानीय लोगों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि कंपनी या प्रशासन किसी भी तरह की परियोजना शुरू करने से पहले विस्थापितों के साथ स्पष्ट वार्ता करे और उनकी सभी लंबित मांगें पूरी करे।
बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं रहीं प्रदर्शन में शामिल
Jamtara इस विरोध प्रदर्शन में सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। प्रदर्शन स्थल पर नुरूल हसन, काजल मंडल, दिनेश मंडल, काजोल मुर्मू, सरिता टुडू, सबिता सोरेन और सीता मुनि समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। विस्थापितों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर सहमति नहीं बनती, तब तक मैथन डैम में इस सोलर प्रोजेक्ट का काम किसी भी कीमत पर शुरू नहीं होने दिया जाएगा।

