रिपोर्टर: मयंक गुप्ता
Gwalior : मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 100 करोड़ रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन पर बने 45 मकानों को तोड़ने पहुँची प्रशासनिक टीम को भारी विरोध के बीच बैरंग लौटना पड़ा। वार्ड क्रमांक 38 स्थित बेलदार का पुरा इलाके में जब भारी पुलिस बल और जेसीबी के साथ अमला कार्रवाई के लिए पहुँचा, तो स्थानीय रहवासियों ने अपने घरों को बचाने के लिए मोर्चा खोल दिया। लोगों ने वैध रजिस्ट्री, नामांतरण और बैंक लोन के कागजात दिखाकर ऐसा हंगामा मचाया कि तनावपूर्ण माहौल के कारण प्रशासन को फिलहाल अपनी कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी।
रहवासियों का कड़ा विरोध: रजिस्ट्री, बिजली बिल और बैंक लोन के दिखाए दस्तावेज
जब प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने शासकीय जमीन पर बने मकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की, तो बड़ी संख्या में महिलाएँ और पुरुष अपने घरों के बाहर आ गए। रहवासियों ने अधिकारियों के सामने वैध दस्तावेजों का पुलिंदा रख दिया। लोगों का कहना था कि उन्होंने वर्षों पहले अपनी गाढ़ी कमाई से जमीन खरीदकर मकान बनाए हैं, जिसकी रजिस्ट्री और नगर निगम में नामांतरण भी कराया गया था। इसके अलावा नियमित रूप से संपत्तिकर और बिजली बिल भरे जा रहे हैं, और कई लोगों ने इन मकानों पर बैंकों से कर्ज भी ले रखा है।
जनता का तीखा सवाल: ‘अगर जमीन सरकारी थी, तो रजिस्ट्री और नामांतरण कैसे हुए?’
कार्रवाई का विरोध कर रहे लोगों ने प्रशासन के सामने एक बहुत बड़ा और जायज सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि यदि यह जमीन पूरी तरह शासकीय थी, तो इसकी रजिस्ट्रियाँ किसने और कैसे कीं? नगर निगम ने नामांतरण और टैक्स की रसीदें कैसे जारी कर दीं? रहवासियों का तर्क था कि उन्होंने तो सरकारी और कानूनी प्रक्रियाओं पर भरोसा करके ही प्लॉट खरीदे थे। आक्रोशित लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनके आशियानों पर बुलडोजर चलाया गया, तो वे अपने परिवारों के साथ बुलडोजर के आगे लेट जाएंगे।
प्रशासन का पक्ष: खसरा नंबर 1887, 1889 और 1890 की जमीन, पूर्व भू-स्वामियों पर होगी FIR
मौके पर पहुँचे एसडीएम नरेंद्र बाबू यादव ने स्थिति को संभालते हुए बताया कि विवादित भूमि खसरा क्रमांक 1887, 1889 और 1890 के अंतर्गत आती है, जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। प्रशासन के अनुसार, जमीन के सरकारी होने की बात जानते हुए भी पूर्व भू-स्वामियों ने इसे अवैध रूप से बेच दिया था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जमीन बेचने वाले पूर्व भू-स्वामियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर एफआईआर की जाएगी। फिलहाल पूर्व भू-स्वामियों द्वारा अदालत से लिए गए स्टे और लोगों के दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा रही है, जिसके बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई तय होगी।

