रिपोर्टर: अरविन्द सिंह
MP : मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले 21 निजी और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों पर योजना से बाहर होने का संकट मंडरा रहा है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन सभी अस्पतालों को वैध एनएबीएच (NABH) गुणवत्ता प्रमाण पत्र जमा करने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। जारी निर्देशों के अनुसार, यदि ये अस्पताल 31 अक्टूबर 2026 तक जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें आयुष्मान योजना से निलंबित या डी-एम्पैनल कर दिया जाएगा।
भोपाल, ग्वालियर और इंदौर के प्रमुख अस्पताल सूची में शामिल
MP कार्रवाई की जद में आने वाले अस्पतालों में राज्य के तीन बड़े शहरों के प्रमुख चिकित्सा संस्थान शामिल हैं। राजधानी भोपाल के सबसे अधिक 10 अस्पतालों पीपुल्स हॉस्पिटल, एलएन मेडिकल कॉलेज एंड जेके हॉस्पिटल, हेल्थ स्टार, मयूर, शुभम, लक्ष्मी मल्टीस्पेशलिटी, एपेक्स, ओम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अरेरा ट्रामा एंड क्रिटिकल केयर और मिलेनियम हॉस्पिटल शामिल हैं इनमें से (पीपुल्स हॉस्पिटल, एलएन मेडिकल कॉलेज, मयूर, एपेक्स आदि) को नोटिस जारी किया गया है।
वहीं, ग्वालियर के 8 अस्पताल कल्पना मल्टीस्पेशलिटी, गालव, डॉक्टर प्लस, शाश्वत, आईपी एंड डॉ. ओएस देवान मेमोरियल, मानसरोवर केयर, डॉ. मुगल स्पर्श और लिंक हॉस्पिटल (जिनमें कल्पना मल्टीस्पेशलिटी, डॉ. प्लस और गालव शामिल हैं) तथा इंदौर के 3 प्रसिद्ध अस्पताल (चरक, ओटू और मेडिप्लस) इस सूची का हिस्सा हैं।
31 अक्टूबर तक प्रमाण पत्र न देने पर होगी कड़ी कार्रवाई
MP राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने साफ कर दिया है कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके लिए सभी संबद्ध अस्पतालों के पास मान्य एनएबीएच (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्सएंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) सर्टिफिकेशन होना आवश्यक है। अस्पतालों को अपनी मान्यता नवीनीकृत या प्रस्तुत करने के लिए 31 अक्टूबर तक की सख्त समयसीमा दी गई है, जिसके बाद कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
नए आयुष्मान कार्डधारक मरीजों को नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज
MP अगर ये अस्पताल निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करते हैं और उन पर निलंबन की कार्रवाई होती है, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। निलंबन की अवधि के दौरान इन अस्पतालों में नए आयुष्मान कार्डधारियों को योजना के तहत मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी। हालांकि, फिलहाल अस्पतालों के पास अपनी मान्यता साबित करने के लिए महीने के अंत तक का समय मौजूद है।

