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रिपोर्टर: अरविन्‍द सिंह

Gwalior : स्कूली बच्चों की सुरक्षा और ऑटो-टैक्सी में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने के गंभीर मुद्दे पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। आदेश जारी होने के 14 साल बीत जाने के बाद भी स्थिति में सुधार न होने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) धर्मवीर यादव और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) विक्रमजीत सिंह कंग को 4 नवंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने परिवहन विभाग द्वारा प्रस्तुत पालन रिपोर्ट को असंतोषजनक माना है।

ऑटो में लकड़ी की पट्टियां लगाने पर रोक और लाइसेंस रद्द करने के आदेश

Gwalior अदालत ने ऑटो-रिक्शा में क्षमता से कई गुना ज्यादा बच्चों को बैठाने और सीट की जगह बढ़ाने के लिए लकड़ी की अतिरिक्त पट्टियां लगाने की प्रथा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि किसी भी वाहन में क्षमता से अधिक स्कूली बच्चे पाए जाते हैं, तो संबंधित ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि मासूम बच्चों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

14 सालों से अवमानना, RTO की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट जताई नाराजगी

Gwalior मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो हाईकोर्ट ने सबसे पहले वर्ष 2013 में स्कूली वाहनों की ओवरलोडिंग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। आदेशों का सख्ती से पालन न होने पर 2016 में अवमानना याचिका दायर की गई, जिस पर 7 दिसंबर 2017 को कोर्ट ने पुनः विस्तृत गाइडलाइंस जारी की थीं। हालांकि, इतने वर्षों बाद भी मैदानी स्तर पर कोई ठोस बदलाव न दिखने और आरटीओ द्वारा पेश रिपोर्ट में आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन न मिलने पर अदालत ने सख्त नाराजगी व्यक्त की।

9 मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों से मांगी गई द्वैमासिक रिपोर्ट

Gwalior सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले सभी 9 जिलों के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों (CJM) को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया है। अदालत ने सभी संबंधित मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में स्कूली वाहनों की जांच करें और हर दो महीने में अपनी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा सके।

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