By: Ravindra Singh
Maa Skandamata : शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी स्कंदमाता को मातृत्व, प्रेम, करुणा और संतान सुख का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से उनकी आराधना करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है। मां का स्वरूप भक्तों को प्रेम, साहस और जिम्मेदारियों को निभाने की प्रेरणा देता है।
नवरात्रि के इस पावन अवसर पर आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की पौराणिक कथा, उनके दिव्य स्वरूप, पूजा की विधि और शक्तिशाली मंत्र के बारे में।
मां स्कंदमाता की पौराणिक कथा
Maa Skandamata पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय को स्कंद नाम से भी जाना जाता है। कथा के मुताबिक, जब तारकासुर के अत्याचार बढ़ने लगे, तब उसका अंत करने के लिए भगवान स्कंद ने देवताओं की सेना का नेतृत्व किया और युद्ध में उसका वध किया।
भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण देवी पार्वती को स्कंदमाता के नाम से जाना गया। मां का यह रूप ममता, वात्सल्य और संतान के प्रति असीम प्रेम का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं और उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं।
कैसा है मां स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप?
Maa Skandamata मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और ममतामयी माना जाता है। वे सिंह पर सवार रहती हैं और उनकी चार भुजाएं हैं। उनके दो हाथों में कमल के फूल सुशोभित होते हैं। एक हाथ से वे भक्तों को आशीर्वाद देती हैं, जबकि दूसरे हाथ में बालरूप भगवान स्कंद को धारण करती हैं।
देवी पीले और लाल वस्त्रों में सुशोभित रहती हैं। उनके मस्तक पर मुकुट और शरीर पर विभिन्न प्रकार के आभूषण उनकी दिव्यता को दर्शाते हैं। कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनका स्वरूप प्रेम, साहस, त्याग और मातृत्व की शक्ति का संदेश देता है।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
Maa Skandamata नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा श्रद्धा और विधि-विधान से करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान इन चरणों का पालन कर सकते हैं:
- सुबह स्नान करें: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
- दीपक जलाएं: मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर के सामने घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- फूल और अक्षत अर्पित करें: देवी को पीले फूल, अक्षत और धूप अर्पित करें।
- भोग लगाएं: मां को केले का भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है। अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य सात्विक प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं।
- मंत्र का जाप करें: मां स्कंदमाता के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और ध्यान लगाएं।
- आरती और प्रार्थना करें: पूजा के अंत में मां की आरती करें, अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
मां स्कंदमाता का मंत्र
Maa Skandamata नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है:
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन एकाग्र होता है और भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।
मां स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं?
Maa Skandamata मां स्कंदमाता को केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार फल, मिठाई या अन्य सात्विक प्रसाद चढ़ा सकते हैं। पूजा में भोग अर्पित करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें।
मां स्कंदमाता की पूजा का धार्मिक महत्व
Maa Skandamata धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना से परिवार में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता बढ़ती है। उन्हें संतान की रक्षा और कल्याण से जोड़कर भी देखा जाता है। भक्त मां से बुद्धि, साहस, सुख-शांति और जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मांगते हैं।
नवरात्रि का पांचवां दिन हमें सिखाता है कि सच्ची शक्ति केवल पराक्रम में नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने में भी निहित है। मां स्कंदमाता की पूजा करते समय मन में श्रद्धा रखें और सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।
Disclaimer: लेख में दी गई पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं परंपराओं पर आधारित हैं। पूजा के नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकते हैं।

