रिपोर्टर: प्रदीप बंसल
Machalpur : शहर के मुख्य चौक-चौराहों, गुमटियों और चाय के ठेलों पर खुलेआम चल रहा सट्टेबाजी का काला बाजार और नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार कानून-व्यवस्था की पोल खोल रहा है। दिन के उजाले में बेखौफ फल-फूल रहे इस सिंडिकेट से एक तरफ जहाँ युवा पीढ़ी बर्बादी की राह पर अग्रसर है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पुलिस और प्रशासन की सुस्ती आम जनता की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
जमीनी हकीकत: बेखौफ सट्टेबाजी और बढ़ता नशे का जाल
Machalpur शहर के कई संवेदनशील इलाकों, बंद पड़ी दुकानों और नुक्कड़ों पर अवैध सट्टे के अड्डे निर्बाध रूप से संचालित हो रहे हैं। तकनीक के इस दौर में अब पारंपरिक पर्ची-सट्टे के साथ-साथ मोबाइल और ऑनलाइन ऐप्स के जरिए भी यह धंधा तेजी से पैर पसार चुका है। इसी के साथ, सार्वजनिक स्थलों पर गांजा, अवैध शराब और अन्य घातक मादक पदार्थों की उपलब्धता बेहद आसान हो गई है। इसका सीधा शिकार स्कूल और कॉलेज जाने वाले युवा हो रहे हैं, जिससे पूरे समाज में डर और असुरक्षा का माहौल पनप रहा है।
पुलिसिया तंत्र पर सवाल: लाचारी या कथित संरक्षण?
Machalpur इतने बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी गतिविधियों का चलना स्थानीय गश्त और निगरानी व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है। आम नागरिकों में अक्सर यह चर्चा रहती है कि बिना स्थानीय पुलिस की अनदेखी या कथित शह के इस तरह के स्थायी अड्डे चलना नामुमकिन है। कई बार क्षेत्रीय लोगों द्वारा लिखित व मौखिक शिकायतें देने के बावजूद ठोस और त्वरित कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकता पूरी की जाती है, जिससे सट्टा माफिया और नशा तस्करों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं।
भावी दिशा: सख्त कार्रवाई और पारदर्शी निगरानी की आवश्यकता
Machalpur इस गंभीर समस्या पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन को केवल छिटपुट कार्रवाइयों तक सीमित न रहकर जड़ पर प्रहार करना होगा। सभी प्रमुख चौराहों पर पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ-साथ एक मजबूत गुप्त सूचना तंत्र (Intelligence Network) तैयार करना बेहद जरूरी है। इसके अतिरिक्त, सट्टा माफिया और नशा तस्करों के खिलाफ बिना किसी राजनैतिक या प्रशासनिक दबाव के कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि समाज को एक सुरक्षित और नशा-मुक्त माहौल मिल सके।

