AI Fake Video Case:दिल्ली पुलिस ने एक युवक को कथित तौर पर AI तकनीक का इस्तेमाल कर पुलिस अधिकारी का आपत्तिजनक और फर्जी वीडियो तैयार करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, वीडियो को सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित किया गया था और इसमें दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त डीसीपी विवेक भगत को एक महिला पत्रकार के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाने का प्रयास किया गया था।
पुलिस का कहना है कि वीडियो वास्तविक घटना का रिकॉर्ड नहीं था, बल्कि AI टूल्स की सहायता से तैयार या एडिट किया गया था। मामले की जांच 3 अक्टूबर को सामने आए सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू की गई।
‘न्यूज आईना’ इंस्टाग्राम अकाउंट से सामने आया वीडियो
AI Fake Video Case:नई दिल्ली के एडीशनल डीसीपी मंजीत के अनुसार, पुलिस ने सबसे पहले उस इंस्टाग्राम अकाउंट की पड़ताल शुरू की, जिससे कथित वीडियो को प्रसारित किया गया था। यह अकाउंट ‘न्यूज आईना’ नाम से संचालित किया जा रहा था।
जांच के दौरान पुलिस ने अकाउंट के संचालन से नदीम अहमद नाम के युवक का संबंध होने का दावा किया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी हरियाणा का रहने वाला है।
AI टूल्स से तैयार करने का पुलिस का दावा
AI Fake Video Case:पूछताछ के दौरान पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वीडियो को AI टूल्स की मदद से एडिट किया गया था। पुलिस का आरोप है कि फर्जी सामग्री के जरिए दिल्ली पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने और लोगों के बीच तनाव पैदा करने का प्रयास किया गया।
हालांकि, वीडियो की तकनीकी प्रकृति और उसे तैयार करने में इस्तेमाल किए गए डिजिटल टूल्स से जुड़े तथ्यों की जांच पुलिस की ओर से जारी है।
कई धाराओं में दर्ज हुआ केस
AI Fake Video Case:दिल्ली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, इनमें शामिल हैं:
- धारा 353 BNS: झूठी सूचना के जरिए लोक शांति या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने से संबंधित प्रावधान।
- धारा 352 BNS: ऐसे कृत्य से संबंधित प्रावधान, जिससे शांति भंग के लिए उकसावे की स्थिति पैदा हो।
- धारा 336 BNS: जालसाजी से संबंधित प्रावधान।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच के दौरान अन्य संभावित धाराओं और तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
वीडियो प्रसारित करने वालों की भी होगी जांच
AI Fake Video Case:जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित फर्जी वीडियो तैयार करने या उसे सोशल मीडिया पर फैलाने में आरोपी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि आरोपी को किसी अन्य व्यक्ति से निर्देश, तकनीकी सहायता या आर्थिक सहयोग मिला था या नहीं। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद मामले में और जानकारी सामने आ सकती है।
AI से बने फर्जी कंटेंट पर बढ़ी चिंता
AI Fake Video Case:इस मामले ने AI की मदद से तैयार किए जाने वाले भ्रामक और फर्जी डिजिटल कंटेंट को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे वीडियो या तस्वीरों में किसी व्यक्ति को ऐसी घटना में दिखाया जा सकता है, जिसमें वह वास्तव में शामिल न रहा हो। इसलिए सोशल मीडिया पर सामने आने वाली संवेदनशील सामग्री की पुष्टि किए बिना उसे आगे साझा करने से बचना महत्वपूर्ण है।

