रिपोर्टर: संजय रावत
Balaghat : मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक में 32 बैगा आदिवासी बच्चों की दुखद मौत के बाद अब क्षेत्र में कुपोषण की एक अत्यंत भयावह तस्वीर उजागर हुई है। मलेरिया और मीजल्स जैसी बीमारियों के साथ-साथ कुपोषण को भी बच्चों की बिगड़ती सेहत का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक जिले में जांचे गए 1 लाख 21 हजार 892 बच्चों में से 27 हजार 839 बच्चे कुपोषित और 3 हजार 741 बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं। अकेले बैहर विधानसभा क्षेत्र में ही 1 हजार 111 बच्चे अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं, जिसने प्रशासनिक और स्वास्थ्य दावों की पोल खोलकर रख दी है।

विधायक संजय उइके ने टेक होम राशन और सरकारी व्यवस्थाओं पर दागे तीखे सवाल

Balaghat बैहर क्षेत्र के स्थानीय विधायक संजय उइके ने सरकारी पोषण व्यवस्था की विफलता पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कैग (CAG) की रिपोर्ट का हवाला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च महीने से ही बच्चों को मिलने वाला टेक होम राशन बंद पड़ा है, और जो राशन पहले बांटा जा रहा था वह भी बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ था।
विधायक द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 तक जांचे गए 1 लाख 15 हजार 828 बच्चों में से 34 हजार 976 बच्चे कम लंबाई (स्टंटिंग), 26 हजार 640 बच्चे कम वजन और 9 हजार 266 बच्चे दुर्बलता (वेस्टिंग) का शिकार पाए गए हैं, जो सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
पोषण ट्रैकर में फर्जीवाड़े का अंदेशा, छुट्टी के दिन भी दर्ज हुई शत-प्रतिशत हाजिरी
Balaghat सरकारी ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप में दर्ज आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है। कई आंगनवाड़ी केंद्रों का रिकॉर्ड 100 प्रतिशत उपस्थिति, नाश्ता और हॉट कुक मील वितरण दर्शा रहा है। यहां तक कि 5 सितंबर 2025 को सरकारी अवकाश होने के बावजूद कुछ केंद्रों में शत-प्रतिशत उपस्थिति और भोजन वितरण का रिकॉर्ड फीड किया गया है। कागजी आंकड़ों की यह बाजीगरी और वास्तविक स्थिति में जमीन-आसमान का फर्क अब उच्चस्तरीय जांच का विषय बन चुका है।
घर-घर पोषण पहुंचाने की प्रशासनिक कवायद और बुनियादी सवाल
Balaghat 32 बैगा मासूमों की मौत के बाद जागे प्रशासन ने अब बोंदारी और आसपास के आदिवासी इलाकों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व स्व-सहायता समूहों के जरिए घर-घर दलिया पैकेट और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का दावा किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी देवेंद्र कुमार सुंदरीयाल ने मामले की निष्पक्ष जांच और व्यवस्था सुधारने की बात कही है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड में इतने बड़े पैमाने पर बच्चे पहले से अति कुपोषित दर्ज थे, तो समय रहते ठोस स्वास्थ्य कदम क्यों नहीं उठाए गए, जिसका खामियाजा आखिरकार मासूमों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।

