रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Korba : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के हरदीबाजार क्षेत्र में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा की गई एक बड़ी तोड़फोड़ की कार्रवाई ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है। दीपका खदान क्षेत्र के अंतर्गत प्रशासन और सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र और हॉस्टल भवन को ढहाए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। विस्थापितों का आरोप है कि उनकी बुनियादी समस्याओं का समाधान किए बिना जबरन कार्रवाई की जा रही है।
मुआवजे और रोजगार को लेकर अनसुनी शिकायतें
Korba प्रभावित भू-स्वामियों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के बदले उन्हें नीति के अनुसार न तो सही मुआवजा मिल रहा है और न ही पात्र युवाओं को नौकरी दी जा रही है। रोजगार पाने के लिए युवा और उनके परिवार लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनमें निराशा और रोष बढ़ता जा रहा है।
पेयजल संकट और भारी ब्लास्टिंग से बढ़ रही मुश्किलें
Korba खदान के लगातार हो रहे विस्तार से हरदीबाजार इलाके में गंभीर जल संकट खड़ा हो गया है। भूजल स्तर गिरने के कारण बोरवेल और हैंडपंप गर्मियों से पहले ही सूख जाते हैं, जिससे पानी के लाले पड़ जाते हैं। इसके साथ ही खदानों में की जाने वाली भारी ब्लास्टिंग की वजह से आसपास के मकानों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
अधूरे पुनर्वास स्थल और प्रशासनिक उपेक्षा पर सवाल
Korba ग्रामीणों ने SECL द्वारा प्रस्तावित पुनर्वास स्थलों पर अधूरे पड़े निर्माण कार्यों और सुविधाओं की कमी पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि देश और उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया समझी जा सकती है, लेकिन इसके एवज में प्रभावितों के अधिकारों और पुनर्वास की उचित व्यवस्था होना अनिवार्य है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी मांगों का स्थायी समाधान नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

