Surender Koli Nithari case releaseSurender Koli Nithari case release
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Surender Koli Nithari case release

Surender Koli Nithari case release:नोएडा के चर्चित निठारी दुष्कर्म और हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत द्वारा आखिरी मामले में भी आरोपमुक्त किए जाने के बाद, कोली बुधवार शाम को ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जिला जेल से रिहा हो गया। इसके साथ ही करीब 19 साल लंबा उसका कानूनी संघर्ष और जेल का सफर समाप्त हो गया है।

लुक्सर जेल से रिहाई और गोपनीयता

Surender Koli Nithari case release:बुधवार शाम करीब 7:16 बजे सुरेंद्र कोली को जेल से रिहा किया गया। उसे लेने के लिए उसकी वकील आयुषी और सिद्धार्थ शर्मा सहित चार लोग जेल परिसर पहुंचे थे। मीडिया के भारी जमावड़े और कैमरों से बचने के लिए कोली और उसके वकीलों ने मास्क पहन रखे थे। जेल से बाहर आने पर कोली के हाव-भाव पूरी तरह सामान्य नजर आए। वह मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब दिए बिना, वकीलों के साथ गाड़ी में बैठकर तुरंत रवाना हो गया।

कानूनी प्रक्रिया के तहत, सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई करते हुए उसकी सजा रद्द कर तत्काल रिहाई के निर्देश दिए थे। मंगलवार को परवाना न मिलने के कारण रिहाई टल गई थी, लेकिन बुधवार सुबह ऑनलाइन आदेश और शाम को आधिकारिक परवाना मिलने के बाद जेल प्रशासन ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर उसे बाहरि का रास्ता दिखा दिया। ज्ञात हो कि कोली को 8 सितंबर 2024 को गाजियाबाद की डासना जेल से लुक्सर जेल शिफ्ट किया गया था।

क्या था निठारी हत्याकांड?

Surender Koli Nithari case release:यह दहला देने वाला मामला 29 दिसंबर 2006 का है, जब नोएडा के निठारी गांव में मुख्य आरोपी मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे बने नाले से कई बच्चों के कंकाल बरामद किए गए थे। पुलिस ने पंधेर के घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को गिरफ्तार किया था। शुरुआत में गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने जांच की, लेकिन 10 दिन बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।

जांच के दौरान पुलिस और फोरेंसिक टीम द्वारा ठोस साक्ष्य जुटाने में कई कमियां रह गईं। अदालत में अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि हत्याएं कोठी के भीतर ही हुई थीं, जिसका सीधा लाभ आरोपियों को मिला।

अदालती फैसले और बरी होने का सफर

  • Surender Koli Nithari case release:फरवरी 2011: सीबीआई की विशेष अदालत ने एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई।
  • जनवरी 2015: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दया याचिका के फैसले में अत्यधिक देरी का हवाला देते हुए उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
  • अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी के 12 मामलों में कोली और पंधेर दोनों को बरी कर दिया।
  • अंतिम राहत: बचे हुए मामलों में से आखिरी मामले में भी सुरेंद्र कोली ने सुप्रीम कोर्ट में सुधारात्मक (क्यूरेटिव) याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश किए गए बयानों और साक्ष्यों को आधारहीन मानते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया, जिससे उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

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