रिपोर्टर: दीनानाथ माऔर
Barun : बिहार के औरंगाबाद जिले अंतर्गत बारुण-नवीनगर-दाउदनगर मार्ग पर स्थित अंग्रेजी हुकूमत के दौर का रेलवे अंडरपास जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। सैकड़ों गांवों को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग के खस्ताहाल होने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासनिक अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए 16 सितंबर को रेलवे चक्का जाम करने की चेतावनी दी है।
चार राज्यों को जोड़ने वाले मार्ग पर औपनिवेशिक दौर का संकीर्ण पुल
Barun यह महत्वपूर्ण सड़क मार्ग केवल स्थानीय गांवों को ही नहीं, बल्कि बिहार को झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी जोड़ता है। अंग्रेजों के जमाने में निर्मित यह अंडरपास बेहद संकीर्ण और कम ऊंचाई वाला है। दशकों पहले जब परिवहन के साधन सीमित थे और पटना कैनाल में स्टीमर चलते थे, तब के हिसाब से बने इस पुल से आज के आधुनिक वाहनों का गुजरना बेहद मुश्किल हो गया है।
बरसात में 5 फीट पानी भरने से ठप हो जाता है आवागमन
Barun बरसात के दिनों में इस अंडरपास की स्थिति भयावह रूप ले लेती है। जलजमाव के कारण यहां 4 से 5 फीट तक पानी भर जाता है, जिससे चार पहिया और भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव और जर्जर संरचना के कारण हर समय बड़े हादसे का अंदेशा बना रहता है, लेकिन केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन लंबे समय से इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठा है।
अधिकारियों तक आवाज पहुंचाने को एकजुट हुए सैकड़ों गांव के लोग
Barun अपनी बहुप्रतीक्षित मांग के समर्थन में सैकड़ों गांवों के लोगों ने एकजुट होकर 16 सितंबर को व्यापक आंदोलन का आह्वान किया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण और वर्तमान संरचना का जीर्णोद्धार बेहद जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक रेलवे विभाग और सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
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