रिपोर्टर: अरमान कुरैशी
Pakistan Saudi Mecca Pact : यमन के हुती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के रणनीतिक मोखा और पेरिम द्वीपों पर कब्जा करने के बाद मध्य पूर्व का तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इस संकट के समय सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ की साख दांव पर लगी है। हालांकि, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सऊदी अरब की सैन्य मदद के लिए सेना भेजने में हिचकिचा रहे हैं।
ईरान के साथ कूटनीतिक संतुलन की मजबूरी
Pakistan Saudi Mecca Pact पाकिस्तान के लिए इस संघर्ष में कूदने का मतलब सीधे तौर पर ईरान और उसके समर्थित गुटों के साथ दुश्मनी मोल लेना होगा। जिस समय हुतियों ने द्वीपों पर नियंत्रण किया, उसी वक्त पाकिस्तानी सेना प्रमुख ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बातचीत में व्यस्त थे।
पाकिस्तान में एक बड़ी शिया आबादी निवास करती है। सऊदी अरब के पक्ष में हुतियों पर हमला करने से पाकिस्तान के भीतर गंभीर सांप्रदायिक और घरेलू विरोध भड़क सकता है।
इस्लामाबाद अपनी पश्चिमी सीमा पर ईरान के साथ किसी नए युद्ध का जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं है।
क्या है ‘मक्का पैक्ट’ और इसकी अनसुलझी शर्तें?
Pakistan Saudi Mecca Pact सितंबर 2025 में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे अगस्त 2026 में ‘मक्का पैक्ट’ का नाम दिया गया। रियाद स्थित संयुक्त सचिवालय वाले इस समझौते की अध्यक्षता फिलहाल 3 वर्षों के लिए पाकिस्तान के पास है।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान के अनुसार, यह समझौता NATO की तर्ज पर काम करता है—यानी मदद तभी भेजी जाती है जब पीड़ित देश औपचारिक मांग करे। हालांकि, इसकी कई शर्तें अभी भी अस्पष्ट हैं:
- किन परिस्थितियों में किसी एक देश पर हुए हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा?
- क्या सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान से सैन्य सहायता की मांग की है या नहीं?
यद्यपि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि अनपेक्षित हमले की स्थिति में मक्का समझौता स्वतः लागू होगा, लेकिन उन्होंने इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर कोई स्पष्टता नहीं दी है।
ट्रंप प्रशासन का रुख और अमेरिकी दबाव
Pakistan Saudi Mecca Pact अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने हुतियों के खिलाफ सैन्य सहायता के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया था, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया।
जनरल आसिम मुनीर बीते एक साल से ट्रंप प्रशासन के साथ रणनीतिक संबंध सुधारने में लगे हैं। अमेरिकी रुख के विपरीत जाकर सऊदी अरब की मदद करना पाकिस्तान को वाशिंगटन के साथ तनाव में डाल सकता है, जिसे मुनीर फिलहाल नजरअंदाज नहीं कर सकते।
यही कारण है कि दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी और मक्का पैक्ट के बावजूद पाकिस्तान इस क्षेत्रीय युद्ध से खुद को दूर रख रहा है।
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