By: Ravindra Singh
Bone marrow : हमारे शरीर के अंदर कई ऐसी प्रक्रियाएं लगातार चलती रहती हैं, जिनका हमें सामान्य तौर पर एहसास नहीं होता। बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा भी शरीर की ऐसी ही महत्वपूर्ण व्यवस्था का हिस्सा है। यह हड्डियों के भीतर मौजूद नरम और स्पंजी ऊतक होता है, जहां शरीर की कई जरूरी रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है।
अक्सर बोन मैरो ट्रांसप्लांट या बोन मैरो टेस्ट के बारे में सुनने को मिलता है, खासकर ब्लड कैंसर और कुछ अन्य गंभीर बीमारियों के संदर्भ में। लेकिन बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि बोन मैरो वास्तव में क्या है, शरीर में कहां पाया जाता है और इसका मुख्य काम क्या होता है। आइए जानते हैं अस्थि मज्जा से जुड़ी जरूरी बातें।
बोन मैरो क्या होता है?
Bone marrow बोन मैरो को हिंदी में अस्थि मज्जा कहा जाता है। यह हड्डियों के अंदर पाया जाने वाला मुलायम, स्पंजी ऊतक है। शरीर के लिए जरूरी रक्त कोशिकाओं के निर्माण में इसकी अहम भूमिका होती है।
बोन मैरो मुख्य रूप से तीन तरह की रक्त कोशिकाएं बनाने में मदद करता है:
- लाल रक्त कोशिकाएं (RBC): शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं।
- सफेद रक्त कोशिकाएं (WBC): संक्रमण और बीमारियों से शरीर की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- प्लेटलेट्स: रक्तस्राव को नियंत्रित करने और खून का थक्का बनाने में मदद करती हैं।
बोन मैरो कैसा दिखाई देता है?
Bone marrow बोन मैरो मुलायम और स्पंजी ऊतक होता है, जिसमें रक्त बनाने वाली कोशिकाएं मौजूद रहती हैं। इसकी वास्तविक स्थिति और कोशिकाओं की जांच माइक्रोस्कोप के जरिए की जा सकती है।
बोन मैरो का प्रभावित होना हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होता। कुछ ब्लड कैंसर जैसे ल्यूकेमिया और मायलोमा में असामान्य कोशिकाएं बोन मैरो में बढ़ सकती हैं। कुछ प्रकार के लिम्फोमा में भी इसका असर हो सकता है।
इसके अलावा ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और फेफड़ों जैसे अंगों के कैंसर की कोशिकाएं हड्डियों तक फैलने पर भी बोन मैरो की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। कुछ मामलों में कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी के कारण भी बोन मैरो की गतिविधि अस्थायी रूप से कम हो सकती है।
बोन मैरो प्रभावित होने पर क्या असर पड़ सकता है?
Bone marrow जब बोन मैरो पर्याप्त मात्रा में रक्त कोशिकाएं बनाने में सक्षम नहीं रहता, तो शरीर में अलग-अलग तरह की समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। उदाहरण के लिए:
- लाल रक्त कोशिकाएं कम होने पर हीमोग्लोबिन कम हो सकता है और एनीमिया की समस्या हो सकती है।
- WBC की संख्या कम होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
- प्लेटलेट्स कम होने पर आसानी से नील पड़ना या रक्तस्राव जैसी समस्या हो सकती है।
हालांकि, Hb, WBC या प्लेटलेट्स की संख्या कम होने का मतलब यह नहीं है कि कैंसर बोन मैरो तक पहुंच गया है। इन स्तरों में कमी के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार बोन मैरो एस्पिरेशन या बायोप्सी जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट कब किया जाता है?
Bone marrow कुछ गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों के उपचार में बोन मैरो ट्रांसप्लांट या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट का इस्तेमाल किया जाता है। इसका निर्णय बीमारी की प्रकृति, मरीज की स्थिति और विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के आधार पर किया जाता है।
हर व्यक्ति को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए इससे संबंधित किसी भी निर्णय के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
बोन मैरो को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
Bone marrow अस्थि मज्जा का स्वास्थ्य शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ा हुआ है। रक्त कोशिकाओं के सामान्य निर्माण के लिए शरीर को पर्याप्त पोषक तत्वों की जरूरत होती है।
1. पोषण का रखें ध्यान
आयरन, विटामिन B12, फोलेट और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व रक्त निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपनी डाइट में इन पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें।
2. नियमित शारीरिक गतिविधि करें
नियमित और संतुलित शारीरिक गतिविधि शरीर के समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है। अपनी क्षमता के अनुसार रोजाना सक्रिय रहने की कोशिश करें।
3. पर्याप्त आराम लें
नींद और आराम शरीर की सामान्य प्रक्रियाओं के लिए जरूरी हैं। इसलिए पर्याप्त और नियमित नींद लेने की आदत बनाएं।
4. तनाव को नियंत्रित करें
लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। योग, ध्यान, हल्की एक्सरसाइज या अपनी पसंद की गतिविधियों के जरिए तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें।
5. अन्य अंगों का भी रखें ख्याल
किडनी और लिवर समेत शरीर के अन्य अंग भी रक्त कोशिकाओं के सामान्य जीवनचक्र और नियमन में भूमिका निभाते हैं। इसलिए संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना जरूरी है।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
Bone marrow अगर बार-बार संक्रमण हो रहा हो, लगातार कमजोरी या थकान महसूस होती हो, बिना स्पष्ट कारण शरीर पर बार-बार नील पड़ते हों या असामान्य रक्तस्राव हो रहा हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। केवल इन लक्षणों के आधार पर बोन मैरो की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी बीमारी, लक्षण, डाइट या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। लेख में बताए गए उपाय किसी चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं हैं।
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