By: Ravindra Singh
Neem Karoli Baba : बाबा नीम करौली महाराज का नाम देश-विदेश में उनके भक्तों के बीच श्रद्धा और आस्था से लिया जाता है। उनकी तस्वीरों में एक चीज अक्सर दिखाई देती है और वह है कंबल। मौसम कोई भी हो, बाबा को साधारण कंबल ओढ़े हुए ही देखा जाता था। यही वजह है कि उनके कंबल को लेकर आज भी श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल हैं। आखिर बाबा हमेशा कंबल क्यों रखते थे और कैंची धाम में भक्त कंबल क्यों चढ़ाते हैं? इससे जुड़ी कई मान्यताएं और कहानियां प्रचलित हैं।
बाबा नीम करौली के जीवन और चमत्कारों से जुड़ी चर्चाओं के बीच उनकी लोकप्रियता एक बार फिर बढ़ी है। अमेरिकी लेखक और बाबा के शिष्य रिचर्ड एलपर्ट, जिन्हें बाद में रामदास के नाम से जाना गया, ने अपनी पुस्तक Miracle of Love में बाबा से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख किया है। इसी पुस्तक में बाबा के कंबल से जुड़ी एक चर्चित घटना का भी जिक्र मिलता है।
कंबल को लेकर क्या है मान्यता?
Neem Karoli Baba बाबा नीम करौली के कंबल को लेकर भक्तों के बीच अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि बाबा बीमार या परेशान लोगों को कंबल ओढ़ाते थे और इससे उन्हें राहत मिलती थी। वहीं कुछ श्रद्धालु इसे बाबा की आध्यात्मिक शक्ति से जोड़कर देखते हैं।
रामदास की पुस्तक में बाबा के कंबल को लेकर ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ से जुड़ी कहानी का उल्लेख मिलता है। बाबा अक्सर नीले या हल्के रंग का कंबल ओढ़ते थे। भक्त इन रंगों को शांति और आध्यात्मिक स्थिरता का प्रतीक भी मानते हैं।
बाबा की अधिकांश प्रसिद्ध तस्वीरों में कंबल नजर आने के कारण समय के साथ यह उनकी पहचान का हिस्सा बन गया। इसी आस्था के चलते कैंची धाम पहुंचने वाले कई श्रद्धालु बाबा को कंबल अर्पित करते हैं।
बाबा के कंबल से जुड़ी मशहूर कहानी
Neem Karoli Baba कंबल से जुड़ी एक कहानी फतेहगढ़ में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपत्ति से संबंधित बताई जाती है। कहा जाता है कि यह घटना वर्ष 1943 की है। एक दिन बाबा अचानक उनके घर पहुंचे और रात वहीं रुकने की इच्छा जताई। बाबा के आगमन से दंपत्ति बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने उनकी सेवा की।
भोजन करने के बाद बाबा कंबल ओढ़कर चारपाई पर सोने चले गए। रात में बुजुर्ग दंपत्ति ने बाबा के कराहने की आवाज सुनी। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उन्हें किसी तरह की गंभीर पीड़ा हो रही हो। चिंता के कारण दोनों रातभर ठीक से सो नहीं पाए और बाबा के पास बैठे रहे।
सुबह बाबा उठे और अपना कंबल समेटकर दंपत्ति को दे दिया। उन्होंने उनसे कंबल को पानी में प्रवाहित करने के लिए कहा। साथ ही बाबा ने उन्हें भरोसा दिलाया कि करीब एक महीने के भीतर उनका बेटा वापस घर आ जाएगा।
एक महीने बाद लौट आया सैनिक बेटा
Neem Karoli Baba बुजुर्ग दंपत्ति ने बाबा के कहे अनुसार कंबल को पानी में प्रवाहित कर दिया। करीब एक महीने बाद उनका बेटा घर लौट आया। वह सेना में था और युद्ध में शामिल होने के लिए गया हुआ था। बेटे को सुरक्षित देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
इसके बाद बेटे ने जो अनुभव बताया, उसने दंपत्ति को हैरान कर दिया। उसने बताया कि लगभग एक महीने पहले दुश्मनों ने उनकी टुकड़ी को घेर लिया था। रातभर हुई गोलीबारी में उसके कई साथी मारे गए, लेकिन वह पूरी घटना के दौरान सुरक्षित रहा। उसे आश्चर्य था कि इतनी भीषण गोलीबारी के बावजूद एक भी गोली उसे नहीं लगी।
भक्तों के बीच प्रचलित मान्यता के अनुसार, यह घटना उसी रात हुई थी जब बाबा बुजुर्ग दंपत्ति के घर ठहरे थे। श्रद्धालु इसे बाबा की कृपा से जोड़ते हैं और मानते हैं कि उन्होंने अपने भक्त के बेटे पर आने वाले संकट को स्वयं झेल लिया।
कैंची धाम में क्यों चढ़ाते हैं कंबल?
Neem Karoli Baba इसी कहानी के प्रचलित होने के बाद बाबा के कंबल को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था और मजबूत हुई। माना जाता है कि भक्त बाबा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए कैंची धाम में कंबल अर्पित करते हैं। हालांकि, इस घटना या कंबल से जुड़े चमत्कारों का कोई प्रमाणित वैज्ञानिक या ऐतिहासिक सबूत उपलब्ध नहीं है।
बाबा नीम करौली का कंबल आज उनकी स्मृतियों और भक्तों की आस्था से जुड़ा प्रतीक बन चुका है। कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कंबल चढ़ाना इसी धार्मिक विश्वास और परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोककथाओं और प्रचलित आस्था पर आधारित है। इन घटनाओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इंडिया टीवी इन मान्यताओं या कथाओं की सत्यता की पुष्टि नहीं करता।
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