रिपोर्टर: प्रेम श्रीवास्तव
Jamshedpur : बिष्टुपुर स्थित सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का सोमवार को पूर्णाहुति और हवन यज्ञ के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन कथा वाचक हिमांशु महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के पावन प्रसंग का संगीतमय वर्णन किया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां दीं और लगभग एक हजार से अधिक लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
कृष्ण-सुदामा प्रसंग से दिया सच्चे प्रेम और निस्वार्थ मित्रता का संदेश
Jamshedpur कथा वाचक हिमांशु महाराज ने सुदामा चरित्र का भावुक वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में स्वार्थ और मतलब के लिए कोई जगह नहीं होती। आज के दौर में जहां लोग स्वार्थ के लिए दोस्तों को धोखा दे देते हैं, वहीं श्रीकृष्ण और सुदामा का संबंध सिखाता है कि जीवन में सच्चा मित्र कितना अनमोल है। उन्होंने बताया कि ईश्वर को किसी आडंबर या महलों के भोजन की नहीं, बल्कि अपने भक्त के निर्मल प्रेम की आवश्यकता होती है।
कलयुग में केवल प्रभु नाम ही मुक्ति का एकमात्र आधार
Jamshedpur कथा के दौरान महाराज ने कलयुग के प्रभाव और उससे बचने के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कलयुग में केवल भगवान का नाम सुमिरन ही जीव को सभी पापों से मुक्त कर सकता है। श्रीकृष्ण द्वारा उद्धव जी को दिए गए उपदेशों और 24 गुरुओं की कथा का स्मरण कराते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान के स्वधाम लौटने के साथ ही पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हुआ।
भव्य हवन-पूजन, महाप्रसाद का वितरण और मंदिर समिति का योगदान
Jamshedpur कथा के अंतिम दिन यजमान परिवारों एवं दानदाताओं द्वारा भव्य महाप्रसाद का आयोजन किया गया। इस सात दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में मंदिर कमेटी के सचिव सुरेश कुमार अग्रवाल, कुंजबिहारी नागेलिया, संतोष संघी, अशोक नरेड़ी, अशोक संघी, महावीर नागेलिया और सत्यनारायण नरेड़ी सहित सभी सदस्यों ने अपना सराहनीय योगदान दिया।
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