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मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी के बीच सहारनपुर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर वाले पोस्टर लगाए जाने से राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। इन पोस्टरों में वर्ष 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित तस्वीरों के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर भी दिखाई गई थी। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पोस्टरों को हटवा दिया।

पोस्टरों पर लिखा था- ‘न भूले थे, न भूलेंगे’

सहारनपुर में लगाए गए पोस्टरों पर 7 सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा से जुड़ी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था। पोस्टरों पर ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे…’ जैसे संदेश भी लिखे हुए थे।

पोस्टर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, इन्हें किस व्यक्ति या संगठन की ओर से लगाया गया था, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

पुलिस ने पोस्टर हटाकर स्थिति संभाली

पोस्टरों की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें मौके से हटवा दिया। प्रशासन की ओर से फिलहाल पोस्टर लगाने वालों के संबंध में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

मामले को देखते हुए यह भी चर्चा है कि पोस्टरों के जरिए 2013 की हिंसा की याद दिलाते हुए राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया गया था। हालांकि, इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

2013 में पश्चिमी यूपी में हुई थी हिंसा

मुजफ्फरनगर में सितंबर 2013 के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रभावित किया था। हर साल इसकी बरसी के दौरान इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं।

सहारनपुर में इस बार लगाए गए पोस्टरों में दंगों से जुड़ी तस्वीरों के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर होने के कारण मामला राजनीतिक रूप से चर्चा में आ गया। फिलहाल पुलिस की ओर से पोस्टर लगाने वालों की पहचान या कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।