सागर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के सागर जिले में कथित जहरीली और मिलावटी शराब पीने से 11 लोगों की मौत के बाद प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने सागर मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मरीजों का हाल जाना और अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की।
राजेंद्र शुक्ला के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज में इस घटना से प्रभावित कई लोगों का उपचार चल रहा है। इनमें 7 मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है, जबकि करीब 45 लोग खतरे से बाहर हैं। एक मरीज को बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस के जरिए AIIMS भोपाल भेजा गया है।
ज्यादा मात्रा में जहरीले पदार्थ के सेवन का दावा
उपमुख्यमंत्री ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि जिन लोगों की मौत हुई, उन्होंने कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जहरीला पदार्थ सेवन किया था। इससे शरीर पर इसका असर तेजी से हुआ और कई लोगों को बचाया नहीं जा सका। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज की पूरी टीम को लगाया गया है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाकर यह पता लगाया जाए कि अवैध शराब कहां तैयार हुई, उसे सागर तक किस माध्यम से पहुंचाया गया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
सस्ती शराब के नाम पर मिलावट का आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, अवैध शराब का कारोबार करने वाले लोग कम कीमत में शराब उपलब्ध कराने का लालच देकर इसे बेच रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, सामान्य शराब के मुकाबले कथित मिलावटी शराब काफी कम कीमत में उपलब्ध कराई जा रही थी।
राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शराब बेचने वालों तक कार्रवाई सीमित रखना नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क का पता लगाकर इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करना है।
10 संदिग्ध हिरासत में, कई लोगों पर केस
पुलिस ने मामले में अब तक 10 संदिग्धों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। इसके साथ ही कई अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि अवैध शराब की आपूर्ति कहां से हुई और स्थानीय स्तर पर इसे किन लोगों ने बेचा।
प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच भी शुरू कर दी है, ताकि घटना के कारणों और अधिकारियों की जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच की जा सके।
आबकारी और प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई
घटना के बाद सरकार ने निगरानी में लापरवाही के आरोपों को गंभीरता से लिया है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि आबकारी विभाग के उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिनकी जिम्मेदारी अवैध शराब की गतिविधियों पर निगरानी रखने की थी। इसके अलावा जिलाधिकारी और उनके अधीन काम करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जानकारी दी गई है।
मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये की मदद
मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। सरकार ने सागर और आसपास के जिलों में अवैध शराब के खिलाफ निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।
प्रशासन को आशंका है कि अवैध शराब की आपूर्ति का नेटवर्क दूसरे इलाकों तक भी फैला हो सकता है। इसलिए संबंधित जिलों के अधिकारियों को सतर्क रहने और संदिग्ध ठिकानों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीणों ने अवैध शराब बिक्री का लगाया आरोप
मामले की जांच के दौरान ग्रामीणों की शिकायतों से भी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। नौराज गांव के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि गांव में कई लोग लंबे समय से अवैध रूप से शराब बेच रहे थे।
शिकायत के मुताबिक, 4 सितंबर को कुछ लोग कथित तौर पर अवैध शराब बेचने वाले एक व्यक्ति के पास पहुंचे थे। वहां उन्हें एक सस्ती देसी शराब उपलब्ध कराई गई। शराब पीने के बाद एक व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई। पहले उसे बंडा अस्पताल ले जाया गया और हालत गंभीर होने पर सागर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
ललितपुर कनेक्शन की भी जांच
पुलिस की जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से संभावित कनेक्शन की बात भी सामने आई है। FIR में एक व्यक्ति का नाम दर्ज है, जिसके संबंध में पुलिस को आशंका है कि कथित अवैध शराब की सप्लाई ललितपुर के मडावरा क्षेत्र से हुई हो सकती है।
पुलिस अप्रैल 2026 में दर्ज एक पुराने मामले को भी जांच के दायरे में रख रही है। उस मामले में ललितपुर से जुड़े एक गिरोह द्वारा अवैध शराब तैयार कर सागर जिले के बंडा क्षेत्र में भेजे जाने का उल्लेख था।
बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
पुलिस ने शिकायत के आधार पर जुझार लोधी, दिनेश सिंह, सौरभ लोधी, गोविंद लोधी, मनोहर लोधी, यशवंत ठाकुर, मनीष लोधी, आशीष साहू, आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रोहित, माखन, अनिकेत गंधर्व, विशाल लोधी, मंगल रजक और राजा सिंह समेत कई लोगों को जांच में शामिल किया है।
फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस कथित जहरीली शराब के स्रोत, उसके निर्माण, परिवहन और वितरण की पूरी कड़ी का पता लगाने पर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
