Krishna JanmashtamiKrishna Janmashtami
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By: Ravindra Singh

Krishna Janmashtami : कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी पावन तिथि की मध्यरात्रि में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर मथुरा के कारागार में जन्म लिया था।

श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक धार्मिक घटना नहीं माना जाता, बल्कि इसे अधर्म और अत्याचार के अंत तथा धर्म की पुनर्स्थापना से जोड़कर देखा जाता है। जन्माष्टमी की कथा में कंस का अत्याचार, देवकी-वसुदेव का कारावास, श्रीकृष्ण का जन्म और उनका गोकुल पहुंचना प्रमुख प्रसंग हैं। आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा।

कंस को मिली थी अपने अंत की भविष्यवाणी

Krishna Janmashtami धार्मिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में मथुरा के राजा उग्रसेन थे। उनके पुत्र कंस ने सत्ता के लालच में अपने पिता को बंदी बनाकर स्वयं मथुरा का राजा बन गया। सत्ता मिलने के बाद उसका अत्याचार लगातार बढ़ता गया और प्रजा उसके शासन से परेशान रहने लगी।

कंस अपनी बहन देवकी से बेहद स्नेह करता था। देवकी का विवाह यदुवंशी वसुदेव के साथ हुआ। विवाह के बाद जब कंस स्वयं नवविवाहित दंपती को विदा करने के लिए रथ चला रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस की मृत्यु का कारण बनेगी।

यह भविष्यवाणी सुनते ही कंस का व्यवहार बदल गया। उसने देवकी को मारने का प्रयास किया, लेकिन वसुदेव ने उसे समझाया कि देवकी से जन्म लेने वाली हर संतान उसे सौंप दी जाएगी। इसके बाद कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया।

कंस ने देवकी की छह संतानों को मार डाला

Krishna Janmashtami कारागार में देवकी और वसुदेव की संतानें जन्म लेने लगीं। कंस ने उनके शुरुआती छह बच्चों को जन्म लेते ही मार डाला। सातवीं संतान के समय भगवान की लीला से गर्भ को रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया, जिनसे आगे चलकर बलराम का जन्म हुआ।

इसके बाद देवकी की आठवीं संतान का समय आया। कंस को पहले से ही इस बच्चे के कारण अपनी मृत्यु का भय था, इसलिए उसने कारागार की सुरक्षा और कड़ी कर दी।

आधी रात को हुआ श्रीकृष्ण का जन्म

Krishna Janmashtami भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में देवकी ने श्रीकृष्ण को जन्म दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उस समय भगवान विष्णु ने दिव्य रूप में देवकी और वसुदेव को दर्शन दिए और बताया कि वे कंस के अत्याचार का अंत करने तथा धर्म की स्थापना के लिए मानव रूप में अवतरित हुए हैं।

इसके बाद भगवान ने सामान्य नवजात शिशु का रूप धारण कर लिया। उसी समय कारागार के प्रहरी गहरी नींद में चले गए और बंद दरवाजे अपने आप खुल गए। वसुदेव ने भगवान श्रीकृष्ण को एक टोकरी में रखा और उन्हें गोकुल ले जाने के लिए निकल पड़े।

उफनती यमुना ने श्रीकृष्ण के लिए बनाया रास्ता

Krishna Janmashtami उस रात तेज बारिश हो रही थी और यमुना नदी का जल काफी बढ़ा हुआ था। वसुदेव जब बालक कृष्ण को लेकर यमुना पार करने लगे, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार नदी का जल उनके लिए मार्ग देने लगा।

इसी दौरान शेषनाग ने अपने फन फैलाकर श्रीकृष्ण और वसुदेव को बारिश से बचाया। वसुदेव सुरक्षित रूप से गोकुल पहुंचे और नंद बाबा के घर भगवान कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया। वहां जन्मी कन्या को लेकर वे वापस मथुरा के कारागार में लौट आए।

कंस को मिली गोकुल में कृष्ण के होने की खबर

Krishna Janmashtami सुबह जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म की सूचना मिली, तो वह तुरंत कारागार पहुंचा। उसने उस नवजात कन्या को देवकी से छीनकर मारने का प्रयास किया, लेकिन वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में चली गई।

धार्मिक कथा के अनुसार, उस कन्या ने कंस को चेतावनी दी कि उसका संहार करने वाला जन्म ले चुका है और वह अब गोकुल में सुरक्षित है। यह सुनकर कंस का भय और क्रोध दोनों बढ़ गए।

श्रीकृष्ण ने कंस के अत्याचार का किया अंत

Krishna Janmashtami कंस ने श्रीकृष्ण को समाप्त करने के लिए कई राक्षसों और असुरों को गोकुल भेजा, लेकिन हर बार उसका प्रयास विफल रहा। श्रीकृष्ण ने बचपन में ही अनेक असुरों का अंत किया और लोगों को कंस के भय से मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़े।

बाद में श्रीकृष्ण मथुरा पहुंचे और कंस का वध कर दिया। इसके साथ ही मथुरा की जनता को उसके अत्याचार से मुक्ति मिली। आगे चलकर श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया और कर्म, धर्म तथा सत्य के मार्ग का संदेश दिया।

क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी?

Krishna Janmashtami जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता में श्रीकृष्ण का अवतार अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और मध्यरात्रि में उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं।

मंदिरों और घरों में झांकियां सजाई जाती हैं, बाल गोपाल का श्रृंगार किया जाता है और कृष्ण जन्म की कथा सुनाई जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में जन्माष्टमी अलग-अलग परंपराओं और उत्सवों के साथ मनाई जाती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि का दावा नहीं किया जाता है।

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