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ढोल-नगाड़ों और जयकारों से गूंजा शहर, आदिवासी नृत्य और आकर्षक झांकियों ने मोहा मन

हातोद। हातोद नगर में बाबा घमंडेश्वर महादेव और बाबा महाकाल की सवारी श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। सवारी के दौरान पूरा नगर भक्तिमय नजर आया। जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी और वातावरण हर-हर महादेव तथा जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।

बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु हातोद पहुंचे। भक्तों ने सवारी के दर्शन कर भगवान शिव से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

ढोल-नगाड़ों के साथ गूंजे जयकारे

सवारी के दौरान ढोल-नगाड़ों और धार्मिक जयघोष ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। मार्ग में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी आस्था प्रकट की। कई स्थानों पर भक्तों ने उत्साह के साथ भगवान शिव का जयघोष किया।

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के बीच खासा उत्साह देखने को मिला। भक्तों के चेहरों पर बाबा के दर्शन की खुशी और मन में महाकाल के प्रति गहरी श्रद्धा नजर आई।

आदिवासी नृत्य और झांकियां बनीं आकर्षण

धार्मिक आयोजन के साथ लोगों के मनोरंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए आदिवासी नृत्य भी आयोजित किया गया। पारंपरिक अंदाज में प्रस्तुत किए गए नृत्य ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

इसके अलावा सवारी में विभिन्न विषयों पर आधारित झांकियां भी शामिल रहीं। इनमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। झांकी के माध्यम से लोगों को पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने का संदेश दिया गया।

पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

पर्यावरण आधारित झांकी ने लोगों को यह संदेश दिया कि पेड़-पौधे मानव जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रकृति की सुरक्षा और हरियाली को बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश को जोड़ने वाली इस पहल की भी लोगों ने सराहना की।

महाकाल की भक्ति में डूबा हातोद

बाबा महाकाल की सवारी ने पूरे हातोद को शिवमय कर दिया। श्रद्धालुओं की जुबां पर एक ही नाम सुनाई दे रहा था—महाकाल। भक्तों ने बाबा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की।

यह आयोजन केवल धार्मिक सवारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक संदेशों का भी सुंदर संगम देखने को मिला।