रिपोर्टर: कैफ़ गद्दी
Giridih : झारखंड के गिरिडीह जिला अंतर्गत धनवार प्रखंड के खैरीडीह गांव में पत्थर खनन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। M/S Warish Stone Mining Operation के संचालन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि प्रशासनिक स्वीकृति महज 4.50 एकड़ भूमि की है, लेकिन वास्तविक खनन कार्य निर्धारित सीमा को पार कर आसपास की रैयती, खतियानी और रजिस्ट्री जमीनों तक फैल चुका है। ग्रामीणों ने इस संदर्भ में धनवार अंचल कार्यालय को एक विस्तृत आवेदन सौंपा है, जिसमें पूरे मामले की GPS आधारित सीमांकन कराने और अवैध खनन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और आबादी के पास ब्लास्टिंग का डर
Giridih ग्रामीणों ने सुरक्षा और रहवासी व्यवस्था को लेकर भी भारी चिंता जताई है:
- आबादी से नजदीकी: खनन क्षेत्र से ग्रामीणों के घर महज 60 से 70 मीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिससे दैनिक जीवन में भारी मशीनों के शोर और धूल का सामना करना पड़ रहा है।
- ब्लास्टिंग का भय: आबादी के इतने करीब भारी ब्लास्टिंग होने से हादसों का डर बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रत्येक घर की वैज्ञानिक दूरी मापने की मांग की है।
- DGMS के आदेशों पर सवाल: आवेदन में कोडरमा क्षेत्र के DGMS द्वारा पूर्व में जारी कथित ‘Danger Zone’ या ‘Stop Order’ के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि इन आदेशों की समीक्षा कर सच्चाई सार्वजनिक की जाए।
- घेराबंदी का अभाव: खुली खदान के चारों ओर सुरक्षा घेराबंदी और चेतावनी बोर्ड न होने से बच्चों और मवेशियों के लिए हर समय खतरा बना रहता है।
हिंसा का साया और उदय कुमार सिंह पर लगे आरोपों की जांच
Giridih खनन विवाद के बीच क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, 22 अप्रैल को अवैध खनन रोकने के प्रयासों के दौरान एक हत्या की घटना भी घटी थी, हालांकि इसकी निष्पक्ष जांच सक्षम एजेंसी द्वारा की जानी बाकी है। इसके अतिरिक्त, विरोध करने पर ग्रामीणों के साथ मारपीट, अभद्र व्यवहार और धमकियों की शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं।
मामले में भाजपा नेता उदय कुमार सिंह पर खनन गतिविधियों के प्रबंधन और बाहरी लोगों के जरिए काम कराने का आरोप लगा है। चूंकि उदय कुमार सिंह को नेता प्रतिपक्ष व धनवार विधायक बाबूलाल मरांडी का करीबी माना जाता है, इसलिए मामले ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अपने जमीन और सुरक्षा अधिकारों की रक्षा करना है।
प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग
Giridih ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष कुल 11 सूत्री मांगें रखी हैं। इनमें स्वीकृत लीज की GPS जांच, DGMS रिपोर्ट का सत्यापन, रैयती जमीनों की पड़ताल और पुलिस कार्रवाई की समीक्षा शामिल है। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन, खान विभाग और पुलिस इस मामले में मौके पर जाकर निष्पक्ष कार्रवाई करते हैं या ग्रामीणों की शिकायतें फाइलों तक ही सीमित रह जाती हैं।
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