रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Mumbai : वर्ष 2013 के बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपनी ही एक जूनियर सहकर्मी द्वारा दर्ज कराए गए इस मामले में अदालत ने सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह सख्त फैसला सुनाया। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर अलग-अलग धाराओं के तहत भारी जुर्माना भी लगाया है।
Mumbai बचाव और अभियोजन पक्ष के बीच तीखी बहस
सुनवाई के दौरान तरुण तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने अदालत से न्यूनतम सजा देने की गुहार लगाई। उन्होंने तर्क दिया कि यह उनका पहला अपराध है, 2013 की इस घटना के बाद उन पर कोई अन्य मामला दर्ज नहीं हुआ है और वे जमानत की शर्तों का लगातार पालन करते आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल (SG) ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा कि आरोपी पीड़िता के लिए अभिभावक के समान भूमिका में था। उन्होंने अदालत का ध्यान इस बात की ओर भी खींचा कि तेजपाल को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं था और पीड़िता के स्पष्ट इनकार के बावजूद उन्होंने अपराध को दोहराया था।
Mumbai हाईकोर्ट द्वारा तय की गई अलग-अलग धाराएं और सजाएं
मामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई:
- धारा 376(2)(f): 10 वर्ष का कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) और 5 लाख रुपये जुर्माना।
- धारा 376(2)(k): 10 वर्ष का कठोर कारावास और 5 लाख रुपये का जुर्माना।
- धारा 354: 1 वर्ष का कठोर कारावास और 10,000 रुपये का जुर्माना।
- धारा 354A: 1 वर्ष का कठोर कारावास तथा उपयुक्त जुर्माना।
13 साल पुराना मामला और तरुण तेजपाल का परिचय
तरुण तेजपाल खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित पत्रिका ‘तहलका’ के संस्थापक और पूर्व प्रधान संपादक रहे हैं। वर्ष 2013 में गोवा के एक 5-स्टार होटल में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी सहकर्मी ने उन पर यौन प्रताड़ना का आरोप लगाया था। इस घटना के बाद पूरे देश में भारी राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश फैला था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और अपीलों के दौर के बाद अब हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए न्याय की मिसाल कायम की है।

