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संसद के पास जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने के मामले में सख्त कानूनी कदम उठाया गया है। आरोपी युवती के खिलाफ नोएडा के एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज की गई है। बीते 23 जुलाई 2026 को हुए इस प्रदर्शन में युवती द्वारा प्रधानमंत्री और उनके संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी का वीडियो सामने आने और पहचान होने के बाद यह मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

संवैधानिक पद के अपमान का आरोप, BNS की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज

नोएडा पुलिस को मिली शिकायत में कहा गया है कि सार्वजनिक मंच से देश के प्रधानमंत्री के विरुद्ध अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करना देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी युवती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया है।

प्रदर्शनकारियों को लेकर दिल्ली सरकार का रुख: क्रिमिनल रिकॉर्ड वालों को छोड़कर मिलेगी राहत

दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर हुए इस आंदोलन में शामिल आम प्रदर्शनकारियों को लेकर दिल्ली सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। सरकार ने फैसला लिया है कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सामान्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कठोर कानूनी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए, हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए निर्दोष लोगों के मामलों की समीक्षा कर उन्हें रिहा करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का कहना है कि आंदोलन से जुड़े इस मामले को आगे बढ़ाने के बजाय बंद किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट के खिलाफ दिल्ली पुलिस सख्त, ‘X’ को भेजा नोटिस

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलाए जा रहे आपत्तिजनक कंटेंट पर बड़ा एक्शन लिया है। पुलिस ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) समेत अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर विवादित सामग्री तुरंत हटाने और इसे पोस्ट करने वाले अकाउंट्स की जानकारी मांगी है। पुलिस के अनुसार, इस प्रकार के आपत्तिजनक कंटेंट से न केवल जनभावनाएं आहत होती हैं बल्कि शांति और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने का खतरा भी पैदा होता है।