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रिपोर्टर: गनेश सिंह

Delhi Police Bust Fake Identity Card Racket : देश की राजधानी दिल्ली में साइबर क्राइम सेल और दिल्ली पुलिस ने एक बेहद चौंकाने वाले और खतरनाक ऑनलाइन रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह शातिर गिरोह बेहद मामूली रकम लेकर हूबहू असली दिखने वाले जाली सरकारी दस्तावेज तैयार कर रहा था। पुलिस की मुस्तैदी से इस हाईटेक जालसाजी का समय रहते खुलासा हो गया है, जिसके तार कई राज्यों से जुड़े होने की आशंका है।

Delhi Police Bust Fake Identity Card Racket सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और साइबर पेट्रोलिंग से खुला राज

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, यह कामयाबी नियमित साइबर पेट्रोलिंग और सोशल मीडिया की कड़ी निगरानी के दौरान हाथ लगी। जांच में सामने आया कि एक बेहद संगठित नेटवर्क इंटरनेट पर सक्रिय था, जो लोगों को नकली पहचान पत्र बनाकर दे रहा था। सबसे गंभीर बात यह है कि लोग इन फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल असली पैन (PAN) कार्ड बनवाने, नए सरकारी दस्तावेज हासिल करने या पुराने दस्तावेजों को अपडेट कराने में कर रहे थे, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा है।

Delhi Police Bust Fake Identity Card Racket ₹100 का रिचार्ज और मिनटों में तैयार हो जाता था जाली डॉक्यूमेंट

इस गिरोह ने एक ऐसी फर्जी वेबसाइट तैयार की थी, जहाँ हर तरह के सरकारी कागजात बनाने का विकल्प था। इस पोर्टल पर जाली निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर वोटर आईडी और आधार जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध थे।

इस वेबसाइट की कार्यप्रणाली की जांच करने के लिए दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने खुद फर्जी नाम से अकाउंट बनाया। उन्होंने ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के जरिए पोर्टल के डिजिटल वॉलेट में ₹100 का रिचार्ज किया। इसके बाद जैसे ही ‘आधार’ का विकल्प चुनकर एक फोटो और काल्पनिक जानकारियां भरीं, वेबसाइट ने तुरंत हूबहू असली जैसा दिखने वाला कार्ड जनरेट कर दिया।

Delhi Police Bust Fake Identity Card Racket असली जैसा QR कोड, लेकिन डेटाबेस से गायब था लिंक

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस वेबसाइट द्वारा बनाए गए नकली वोटर आईडी और आधार कार्ड का फॉर्मेट, डिजाइन, फॉन्ट और लुक पूरी तरह असली जैसा था। यहाँ तक कि अपराधियों ने इसमें बारकोड और क्यूआर (QR) कोड भी लगा रखा था। हालांकि, जब इस जाली कार्ड के बारकोड को स्कैन किया गया, तो उसने आधिकारिक सरकारी डेटाबेस से कनेक्ट होने के बजाय सिर्फ वही जानकारी दिखाई जो यूजर ने वेबसाइट पर खुद टाइप की थी।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जालसाजी और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस अब इस वेबसाइट के सर्वर, पेमेंट गेटवे और इसके मुख्य ऑपरेटरों को दबोचने के लिए देशव्यापी छापेमारी कर रही है।

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