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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Dongargarh Hostel tree cutting case : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां डोंगरगढ़ स्थित आदिम जाति कल्याण विभाग के पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास परिसर में बिना किसी कानूनी अनुमति के दर्जनों हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया। इस मामले में सीधे तौर पर तत्कालीन छात्रावास अधीक्षक आशीष भागड़कर पर नियमों को ताक पर रखकर पेड़ों की कटाई कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए आदिम जाति कल्याण विभाग ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

Dongargarh Hostel tree cutting case बिना राजस्व व विभागीय अनुमति के काटे गए दर्जनों पेड़

शुरुआती जानकारी के अनुसार, डोंगरगढ़ के इस सरकारी छात्रावास परिसर में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई। नियमानुसार किसी भी सरकारी परिसर में पेड़ काटने के लिए राजस्व विभाग और संबंधित उच्च अधिकारियों से लिखित मंजूरी लेनी अनिवार्य होती है। आरोप है कि तत्कालीन अधीक्षक ने इन सभी नियमों को दरकिनार कर दिया। इसके अलावा, कटे हुए पेड़ों की कीमती लकड़ियों को प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास में ईंधन (जलाऊ लकड़ी) के रूप में इस्तेमाल करने के लिए भेज दिया गया, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

Dongargarh Hostel tree cutting case छात्रों की शिकायत पर सहायक आयुक्त ने बैठाई जांच

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्रावास के छात्रों ने हिम्मत दिखाकर इस अवैध कटाई की शिकायत सीधे आदिम जाति कल्याण विभाग के आला अधिकारियों से की। छात्रों की शिकायत का त्वरित संज्ञान लेते हुए विभाग की सहायक आयुक्त दीक्षा गुप्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Dongargarh Hostel tree cutting case वर्तमान पदस्थापना और आगामी कार्रवाई पर टिकी नजरें

आरोपों के घेरे में आए तत्कालीन अधीक्षक आशीष भागड़कर का तबादला वर्तमान में कोठीटोला छात्रावास में हो चुका है। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि पदस्थापना बदलने से कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा और जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी। अब हर किसी की नजरें आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो पाएगा कि इस पर्यावरण उल्लंघन के पीछे असली मंशा क्या थी।

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