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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Supreme Court AI Warning : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अनियंत्रित और भ्रामक इस्तेमाल को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कुछ खास परिस्थितियों में AI का गलत उपयोग न्याय व्यवस्था के लिए “विनाशकारी” साबित हो सकता है। अदालत ने साफ किया कि कानूनी और न्यायिक क्षेत्र में एआई महज एक सहायक जरिया हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय और तथ्यों की प्रामाणिकता जांचने की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ इंसानों की ही होनी चाहिए।

Supreme Court AI Warning फर्जी एआई सामग्री के आधार पर आया NCLT का फैसला रद्द

यह पूरा मामला एसेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े दिवालियापन (Insolvency) प्रक्रिया के विवाद से उपजा था। राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने अपने एक फैसले के समर्थन में कुछ ऐसे कानूनी उदाहरणों और पुराने फैसलों का हवाला दे दिया था, जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे और उन्हें एआई द्वारा काल्पनिक रूप से तैयार किया गया था। इस पर संज्ञान लेते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने NCLT और NCLAT दोनों के आदेशों को पूरी तरह निरस्त कर दिया और मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया।

Supreme Court AI Warning एआई के गलत इस्तेमाल की तुलना ‘भोपाल गैस त्रासदी’ की जहरीली गैस से की

सर्वोच्च अदालत ने इस खतरे की गंभीरता को रेखांकित करने के लिए इसकी तुलना ‘मिथाइल आइसोसाइनेट’ (भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार जहरीली गैस) से की। पीठ ने कहा कि अदालतों में फर्जी और मनगढ़ंत कानूनी दलीलों का प्रवेश एक अदृश्य और कपटी जहर की तरह है। जब तक इस गड़बड़ी की पहचान हो पाती है, तब तक यह पूरी न्याय प्रणाली की साख, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को अपूरणीय क्षति पहुंचा चुका होता है।

Supreme Court AI Warning जजों और वकीलों को सख्त हिदायत; बार काउंसिल को गाइडलाइंस के निर्देश

अदालत ने न्यायिक पवित्रता बनाए रखने के लिए कानूनी बिरादरी को कड़ा संदेश दिया है:

  • वकीलों के लिए: यदि कोई अधिवक्ता बिना सत्यापन (Verification) किए एआई द्वारा निर्मित मनगढ़ंत मामलों को कोर्ट में पेश करता है, तो इसे पेशेवर कदाचार (Professional Misconduct) माना जाएगा।
  • न्यायाधीशों के लिए: यदि कोई जज बिना जांचे-परखे ऐसे काल्पनिक उदाहरणों को अपने फैसले का आधार बनाता है, तो इसे गंभीर न्यायिक चूक माना जाएगा।
  • बार काउंसिल को आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया है कि वह वकीलों द्वारा एआई के इस्तेमाल को लेकर जल्द से जल्द सख्त और स्पष्ट गाइडलाइंस तैयार करे।

अदालत ने माना कि एआई से काम का बोझ कम हो सकता है, लेकिन इस पर अत्यधिक निर्भरता इंसानी विवेक और निर्णय क्षमता को पंगु बना देगी।

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