रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Constable Sunil Kumar Shukla Dismissed Lucknow Police : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस महकमे से एक बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन के मामले में सिपाही (कॉन्स्टेबल) सुनील कुमार शुक्ला को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर विभाग के आला अधिकारियों और गणना प्रभारी पर हर महीने अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन जांच में वे इसके पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं कर सके।
Constable Sunil Kumar Shukla Dismissed Lucknow Police फेसबुक पर 4 वीडियो जारी कर महकमे में मचाया था हड़कंप
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात रहे 2015 बैच के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला (मूल निवासी: गौरीगंज, अमेठी) ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर चार वीडियो अपलोड किए थे। इन वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस लाइन में सिपाहियों की ड्यूटी बदलने के नाम पर हर महीने ₹2,000 की अवैध वसूली की जाती है। उन्होंने इस रैकेट में रिजर्व पुलिस लाइन के आरआई (RI), गणना प्रभारी और कुछ आईपीएस अधिकारियों तक के शामिल होने का दावा किया था। यही नहीं, उन्होंने विभाग की तुलना ‘काले अंग्रेज’ और ‘जमींदारी प्रथा’ से करते हुए बेहद अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था।
Constable Sunil Kumar Shukla Dismissed Lucknow Police जांच कमेटी के सामने नहीं टिके दावे, एक भी साक्ष्य नहीं कर पाए पेश
सिपाही के इन गंभीर आरोपों के बाद महकमे में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद 7 मई को मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया। जांच के दौरान आरोपित अधिकारियों और शिकायतकर्ता सिपाही सुनील कुमार शुक्ला समेत सभी पक्षों को अपनी बात और सबूत रखने का पूरा मौका दिया गया। लंबी चली इस विभागीय जांच में सुनील कुमार शुक्ला अपने द्वारा लगाए गए किसी भी आरोप के समर्थन में एक भी ठोस सबूत या साक्ष्य पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे।
Constable Sunil Kumar Shukla Dismissed Lucknow Police अनुशासनहीनता और सोशल मीडिया पॉलिसी के उल्लंघन पर गिरी गाज
लखनऊ पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, सिपाही सुनील कुमार शुक्ला को सोशल मीडिया मंचों के दुरुपयोग, घोर विभागीय अनुशासनहीनता और बिना किसी सबूत के पुलिस बल की छवि को जनता के बीच धूमिल करने का दोषी पाया गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति-2023, उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली-1956 (नियम 3, 6, 7 और 27) के साथ-साथ पुलिस वर्दी विनियम का भी सीधा उल्लंघन किया है। आरोप सिद्ध होने के बाद उन्हें सेवा से निष्कासित कर दिया गया है। गौरतलब है कि इस विवाद के शुरुआती दौर में एक महिला हेड कॉन्स्टेबल नीतू सिंह पर भी गाज गिरी थी और एक दारोगा समेत 12 पुलिसकर्मियों को गणना कार्यालय से हटा दिया गया था।

