रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Sehore Seevan River Beautification Corruption : सीहोर शहर की जीवनदायिनी कही जाने वाली सीवन नदी के संरक्षण और सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार के काले बादल मंडराने लगे हैं। नदी के किनारों और घाटों को सुरक्षित करने के लिए किए जा रहे पिचिंग (पेंचिंग) कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से चल रही इस महत्वाकांक्षी योजना में गुणवत्ता की अनदेखी से स्थानीय निवासियों में भारी रोष है, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की मजबूती पर ही सवालिया निशान लग गया है।
Sehore Seevan River Beautification Corruption कमजोर पत्थरों के इस्तेमाल से ढह सकती है पिचिंग की दीवार
स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि पिचिंग के काम में तय नियमों और मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। मजबूत और टिकाऊ बोल्डर पत्थरों की जगह बेहद भुरभुरे और कमजोर पत्थरों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि ये पत्थर इतने कमजोर हैं कि पानी के सामान्य बहाव या मामूली दबाव से भी बिखर सकते हैं। ऐसे में आगामी बारिश के मौसम में नदी का कटाव रोकने का मूल उद्देश्य ही फेल साबित होगा।
Sehore Seevan River Beautification Corruption सीमेंट-कंक्रीट के मिश्रण में खेल, तकनीकी जांच से नदारद रहे जिम्मेदार
निर्माण कार्य में इस्तेमाल किए जा रहे मसाले (मोर्टार) की गुणवत्ता भी बेहद खराब बताई जा रही है। आरोप है कि लागत बचाने के चक्कर में सीमेंट का अनुपात काफी कम रखा गया है और उसकी जगह घटिया डस्ट (बारीक चूरी) का अधिक उपयोग किया जा रहा है, जिससे पत्थरों की पकड़ कमजोर हो रही है। इस धांधली के पीछे नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मौके पर न तो कोई तकनीकी अधिकारी निरीक्षण के लिए आता है और ना ही काम की निगरानी की जा रही है, जिससे ठेकेदार को मनमानी की खुली छूट मिल गई है।
Sehore Seevan River Beautification Corruption उच्च स्तरीय जांच और री-वर्क की मांग को लेकर जनता में आक्रोश
सीवन नदी सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि सीहोर की पहचान और पर्यावरण का मुख्य आधार है। इसके संरक्षण कार्य में हो रहे इस कथित घोटाले को लेकर सामाजिक संगठनों और आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। नागरिकों ने मांग की है कि किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से इस पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, घटिया काम को खारिज कर दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और पूरी पिचिंग को दोबारा मजबूत सामग्री के साथ तैयार करवाया जाए।
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