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रिपोर्टर: अतहर खान

Munger : एक हाथ में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और दूसरे हाथ में अपने ऊंचे सपनों की उड़ान—मुंगेर पुलिस के एक जांबाज सिपाही ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो ड्यूटी की थकान भी आपकी कामयाबी का रास्ता नहीं रोक सकती। मुंगेर डीआईजी कार्यालय में तैनात आरक्षी अमृत कुमार ने 70वीं संयुक्त मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा (BPSC) में शानदार सफलता हासिल करते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में देश भर में 350वीं रैंक हासिल की है। अब उनकी यह गौरवगाथा महज एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्षरत हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय बन चुकी है।

Munger किसान के बेटे का सिपाही से अधिकारी बनने तक का सफर

अमृत कुमार मूल रूप से सहरसा जिले के कहरा प्रखंड के बरियाही गांव के रहने वाले हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे अमृत के पिता सुरेंद्र प्रसाद यादव ने तंगहाली और सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे की शिक्षा-दीक्षा में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। अमृत साल 2013 में बिहार पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग गया जिला बल में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने शेखपुरा में भी अपनी कर्तव्यनिष्ठ सेवाएं दीं। वर्तमान में वे मुंगेर प्रक्षेत्र के डीआईजी कार्यालय की गोपनीय शाखा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन खाकी पहनने के बाद भी उन्होंने अपने भीतर के छात्र और अपने बड़े प्रशासनिक अधिकारी बनने के लक्ष्य को कभी ओझल नहीं होने दिया।

Munger वर्दी के कड़े अनुशासन के बीच ‘सेल्फ स्टडी’ की ताकत

डीआईजी कार्यालय की गोपनीय शाखा जैसी संवेदनशील और व्यस्ततम ड्यूटी के बाद जब लोग आराम की तलाश करते हैं, तब अमृत किताबों की दुनिया में खो जाते थे। बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान के, केवल स्वाध्याय (सेल्फ स्टडी) और कड़े समय प्रबंधन के बल पर उन्होंने राज्य की इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में परचम लहराया है। अमृत ने अपनी इस अद्भुत सफलता का श्रेय अपनी जीवनसंगिनी को देते हुए बताया, “मेरी पत्नी खुद बिहार पुलिस में सिपाही हैं। तीन बच्चों की देखभाल और घर की पूरी जिम्मेदारी अकेले संभालकर उन्होंने मुझे पढ़ाई के लिए जो समय और मानसिक सुकून दिया, उसी के बदौलत आज मैं इस मुकाम पर हूँ।” उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, निरंतर परिश्रम और खुद पर भरोसा रखने से हर मंजिल पाई जा सकती है।

Munger पुलिस महकमे में जश्न, साथियों के लिए बने मिसाल

अमृत कुमार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न सिर्फ उनका पैतृक गांव और परिवार झूम रहा है, बल्कि पूरा बिहार पुलिस महकमा खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। डीआईजी कार्यालय के उनके साथी पुलिसकर्मियों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अमृत की यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की बात नहीं है; यह कहानी है अटूट धैर्य, बेजोड़ अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों को झुका देने वाले आत्मविश्वास की। अमृत अब उन तमाम कामकाजी युवाओं के लिए एक जीवंत मिसाल बन चुके हैं, जो नौकरी की व्यस्तताओं के बीच अपने बड़े सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं।

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