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रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर

Supaul : बिहार के सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड में मंगलवार (16 जून, 2026) को एक विशेष ‘सहयोग-सह-जन कल्याण शिविर’ का आयोजन किया गया। इस शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग के मंत्री और सुपौल जिले के प्रभारी मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा खुद रामपुर पंचायत सरकार भवन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का बारीकी से निरीक्षण किया, आम जनता से सीधा संवाद किया और अधिकारियों को जनता की शिकायतों का तुरंत निवारण करने के सख्त निर्देश दिए।

Supaul कलेक्ट्रेट और दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति दिलाएंगे ऐसे शिविर

शिविर स्थल पर जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रभारी मंत्री का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद मंत्री ने परिसर में घूमकर अलग-अलग विभागों के स्टॉलों की कार्यप्रणाली को देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अक्सर ग्रामीण इलाकों के लोगों को राशन कार्ड, पेंशन, आवास योजना या भूमि विवाद जैसी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए ब्लॉक, अनुमंडल या जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। सरकार की इस अनूठी पहल का उद्देश्य यही है कि प्रशासन खुद चलकर जनता के दरवाजे तक पहुंचे और एक ही छत के नीचे उनकी सभी समस्याओं का समाधान कर सके।

Supaul पात्र हितग्राहियों को बिना किसी भेदभाव के मिलेगा योजनाओं का लाभ

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने शिविर में आए बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं से मुलाकात की और उनकी परेशानियों को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ सुना। कई आवेदकों ने अपनी लंबित सामाजिक सुरक्षा पेंशन और राशन कार्ड से जुड़ी फाइलें मंत्री के सामने रखीं। मौके पर मौजूद अधिकारियों को हिदायत देते हुए मंत्री कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी पात्र व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के उसका हक मिलना चाहिए और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

Supaul जनता ने की पहल की तारीफ, अधिकारियों को समयबद्ध निवारण के निर्देश

रामपुर पंचायत सरकार भवन में आयोजित इस शिविर को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं में भारी उत्साह देखा गया। लोगों ने गांव में ही जिला स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी को एक बेहतरीन कदम बताया। मंत्री ने अंत में प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिविर में जितने भी आवेदन और शिकायतें प्राप्त हुई हैं, उनकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी आवेदनों का निपटारा एक निर्धारित समय सीमा (टाइमलाइन) के भीतर होना चाहिए, ताकि जनता का भरोसा सरकार और प्रशासन पर और मजबूत हो सके।

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