रिपोर्टर: वेदान्त साहू
Ishq Karo Party : इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इन दिनों करोच जनता पार्टी’ (CJP) की जबरदस्त चर्चा के बीच एक और नए दल की घोषणा ने सबका ध्यान खींचा है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने आधिकारिक तौर पर ‘इश्क करो पार्टी’ (IKP) की शुरुआत करने का एलान किया है। इस अनोखे अभियान के संरक्षक खुद काटजू हैं और उन्होंने इसके लिए बाकायदा सोशल मीडिया पर सदस्यता अभियान भी छेड़ दिया है।
Ishq Karo Party एक्स (X) पर की मुहिम से जुड़ने की अपील, यह है ऑफिशियल ईमेल
पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर इस अभियान की घोषणा करते हुए लोगों से इससे जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने पार्टी में शामिल होने के इच्छुक लोगों के लिए एक आधिकारिक ईमेल आईडी भी जारी की है।
काटजू ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जो भी नागरिक इस विचारधारा से जुड़ना चाहते हैं और देश में बदलाव के पक्षधर हैं, वे सीधे ishqkaroparty@gmail.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं।
Ishq Karo Party “यह कोई मजाक नहीं, बल्कि गंभीर राष्ट्रीय समस्याओं के खिलाफ एक बड़ा प्रयास है”
काटजू ने उन लोगों को कड़ा जवाब दिया जो इस नाम को महज एक मजाक या सिर्फ लड़के-लड़कियों के बीच प्रेम-प्रसंग और ‘वैलेंटाइन डे’ जैसी गतिविधियों से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि ‘इश्क करो पार्टी’ का विजन बेहद गंभीर है।
उनके अनुसार, भारत इस समय गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, बाल कुपोषण, महंगी शिक्षा, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और बेकाबू महंगाई जैसी भयंकर समस्याओं से जूझ रहा है। इन संकटों का समाधान तब तक संभव नहीं है, जब तक देश की जनता एकजुट न हो। आज राजनेता अपने वोट बैंक के स्वार्थ में समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांट रहे हैं। इस दल का मुख्य उद्देश्य इसी नफरत को खत्म कर समाज में आपसी सद्भाव, प्यार और अखंडता को स्थापित करना है।
Ishq Karo Party ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके पर कसा तीखा तंज
अपनी पोस्ट के जरिए पूर्व जज ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के फाउंडर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके पर भी तीखा निशाना साधा। हाल ही में, 6 जून को अभिजीत दीपके ने देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।
इस मांग पर कटाक्ष करते हुए काटजू ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगना नासमझी की पराकाष्ठा है। अगर मौजूदा शिक्षा मंत्री पद छोड़ भी देते हैं, तो सरकार उनकी जगह किसी अन्य नेता को मंत्री बना देगी। व्यवस्था में बुनियादी बदलाव किए बिना सिर्फ चेहरों को बदलने से देश की शिक्षा प्रणाली में कोई सुधार नहीं आने वाला है।
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