Nepal : भारत सरकार द्वारा आयात नियमों में नरमी बरतने के बाद नेपाल के चाय उद्योग ने राहत की सांस ली है। पिछले करीब 19 दिनों से सख्त टेस्टिंग नियमों के कारण सीमा पर थमा हुआ चाय का निर्यात अब दोबारा रफ्तार पकड़ने लगा है। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के निर्देश पर चाय बोर्ड ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में जरूरी बदलाव किए हैं, जिससे सीमा पर अटके ट्रकों की आवाजाही का रास्ता साफ हो गया है।
Nepal 1 मई के सख्त नियमों से थमी थी चाय की खुशबू
भारत सरकार ने 1 मई से गुणवत्ता नियंत्रण के नाम पर एक नया नियम लागू किया था। इसके तहत नेपाल से आने वाली चाय की हर खेप का सैंपल लेकर कोलकाता की लैब में जांच के लिए भेजना अनिवार्य कर दिया गया था। इस प्रक्रिया के कारण जांच रिपोर्ट आने में 10 से 14 दिन का लंबा समय लग रहा था। परिणामस्वरूप, पानीटंकी सीमा जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर चाय से लदे ट्रक हफ्तों तक फंसे रहे, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान, ट्रकों का अतिरिक्त किराया और डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ रहा था।
Nepal नए नियमों में संशोधन: घरेलू बाजार के लिए टेस्टिंग से छूट
नेपाल सरकार और नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास के राजनयिक प्रयासों के बाद भारत सरकार ने अपनी नीति में व्यावहारिक बदलाव किया है। संशोधित नियमों के अनुसार, नेपाल की जो चाय भारत के घरेलू बाजार में बिकने के लिए आएगी, उसे अब इस अनिवार्य लैब टेस्टिंग से पूरी तरह छूट दे दी गई है। हालांकि, मिलावट रोकने और सुरक्षा के लिहाज से भारतीय सीमा शुल्क विभाग और FSSAI की निगरानी बनी रहेगी। इसके अलावा, जो चाय भारत के रास्ते तीसरे देशों में दोबारा निर्यात (Re-export) की जाएगी, उसकी जांच पहले की तरह ही जारी रहेगी।
Nepal भारी गिरावट के बीच नए बाजारों की तलाश पर जोर
आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के शुरुआती 9 महीनों में नेपाल का चाय निर्यात 19% गिरकर 2.89 अरब नेपाली रुपये पर आ गया है। हालांकि भारत आज भी नेपाली चाय का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन इस हालिया संकट ने नेपाल के नीति निर्माताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी व्यापारिक अनिश्चितताओं से बचने के लिए नेपाल को भारत पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी और पाकिस्तान, चीन, रूस तथा मिडिल-ईस्ट जैसे नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पैठ बनानी होगी।

