Trump’s new bet : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। ट्रंप ने विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का नाम बदलकर ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ के रूप में संबोधित किया है। उनकी इस टिप्पणी ने न केवल राजनयिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों को चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है।
Trump’s new bet सोशल मीडिया पोस्ट और नक्शे का विवाद
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक तस्वीर साझा की, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
- बदला हुआ नक्शा: साझा की गई तस्वीर में एक नक्शा दिखाया गया है जिसमें ऐतिहासिक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की जगह ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ लिखा गया है। यह पोस्ट मूल रूप से एक समर्थक अकाउंट द्वारा साझा की गई थी, जिसे ट्रंप ने बिना किसी कैप्शन के री-पोस्ट किया।
- रणनीतिक महत्व: गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह संकरा समुद्री मार्ग है, जहाँ से दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाने की क्षमता रखती है।
Trump’s new bet पुरानी गलती या सोचा-समझा संकेत?
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस शब्दावली का प्रयोग किया है। इससे पहले मार्च में मियामी में एक निवेश फोरम के दौरान भी उन्होंने गलती से (या जानबूझकर) होर्मुज को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कह दिया था।
- ट्रंप का स्पष्टीकरण: अपनी पिछली टिप्पणी पर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा था कि “मुझसे बड़ी गलती हो गई,” लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा था कि उनके जीवन में कुछ भी “इत्तेफाक” से नहीं होता। जानकारों का मानना है कि ट्रंप इस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल कर वैश्विक व्यापार मार्गों पर अमेरिकी प्रभुत्व और अपनी व्यक्तिगत ब्रांडिंग को प्रदर्शित करना चाहते हैं।
Trump’s new bet नौसैनिक नाकेबंदी और ईरान की कड़ी चेतावनी
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सख्त नौसैनिक नाकेबंदी की बात कही है।
- तेल की कीमतों में उछाल: ट्रंप के कड़े रुख और नाकेबंदी के संकेतों के कारण कच्चे तेल की कीमतें पिछले 4 वर्षों के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन वे दबाव की रणनीति (Pressure Tactics) से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
- ईरान का पलटवार: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी रणनीति को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी प्रकार की समुद्री नाकेबंदी को स्वीकार नहीं करेंगे और यदि दबाव जारी रहा, तो इसका कड़ा सैन्य जवाब दिया जाएगा।
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