Sita Navami 2026 : सीता नवमी का धार्मिक महत्व
आज सीता नवमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इसी दिन माता Sita का धरती पर प्राकट्य हुआ था। वे राजा जनक की पुत्री थीं, इसलिए उन्हें जानकी भी कहा जाता है और इस दिन को जानकी जयंती के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन व्रत रखकर माता सीता और भगवान Rama की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से पूजा करने पर साधक को पुण्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
Sita Navami 2026 सीता नवमी 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार:
- नवमी तिथि प्रारंभ: 24 अप्रैल 2026, शाम 7:21 बजे
- नवमी तिथि समाप्त: 25 अप्रैल 2026, शाम 6:27 बजे
मध्याह्न पूजा का समय
- शुभ मुहूर्त: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 1:53 बजे तक
- मध्याह्न क्षण: दोपहर 12:37 बजे
माना जाता है कि इसी समय माता सीता का प्राकट्य हुआ था, इसलिए यह पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है।
Sita Navami 2026 पूजा विधि (सरल तरीका)
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें
- घर के मंदिर में माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा स्थापित करें
- फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें
- मंत्र जप करते हुए आरती करें
- अंत में प्रसाद वितरित करें
Sita Navami 2026 सीता नवमी के शक्तिशाली मंत्र
इस दिन इन मंत्रों का जप करना विशेष फलदायी माना जाता है:
- ॐ सीतायै नमः
- ॐ श्री सीता रामाय नमः
- श्री जानकी रामाभ्यां नमः
विशेष मंत्र
ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे रामवल्लभायै धीमहि। तन्नः सीता प्रचोदयात्।।
इन मंत्रों का कम से कम 11 बार जप करके पुष्प अर्पित करें और आशीर्वाद प्राप्त करें।
व्रत का महत्व
सीता नवमी का व्रत रखने से:
- दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि आती है
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
- पुण्य फल की प्राप्ति होती है
सीता नवमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस दिन पूजा, व्रत और मंत्र जाप से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक आस्थाओं और मान्यताओं पर आधारित है। इसे सामान्य जानकारी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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