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रिपोर्टर: सन्‍तोष सरावगी

Dabra : नगर पालिका डबरा में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला सरकारी आवास पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक अनदेखी का है। नगर पालिका के पूर्व बाबू रामू गुप्ता, जिनका स्थानांतरण करीब एक वर्ष पूर्व नगर परिषद पिछोर हो चुका है, ने अभी तक अपना सरकारी आवास खाली नहीं किया है। हैरानी की बात यह है कि बाबू का अपना निजी दो मंजिला मकान शिक्षक कॉलोनी में स्थित है, जिसे उन्होंने किराए पर उठा रखा है।

Dabra सीएमओ और एसडीएम को शिकायत, फिर भी कार्रवाई सिफर

एसडीएम रूपेश रतन सिंघई
सीएमओ साक्षी वाजपेई

इस मामले को लेकर सजग नागरिकों द्वारा दिनांक 26 अगस्त 2025 को मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को शिकायती आवेदन सौंपा गया था, जिसकी आवक क्रमांक 1100 है। इसके अतिरिक्त, जनसुनवाई में माननीय एसडीएम महोदय को भी इस धांधली से अवगत कराया गया था। एसडीएम ने सीएमओ को त्वरित जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए थे, परंतु महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

Dabra निजी मकान से कमाई और सरकारी आवास पर ‘कब्जा’

शिकायत के अनुसार, रामू गुप्ता का शिक्षक कॉलोनी में पिछले 10 वर्षों से अपना स्वयं का दो मंजिला भव्य मकान है। बाबू अपने निजी मकान में किराएदारों को रखकर मोटी रकम वसूल रहे हैं, जबकि स्वयं नियम विरुद्ध तरीके से सरकारी आवास पर कब्जा जमाए बैठे हैं। नियमानुसार, स्थानांतरण के बाद एक निश्चित अवधि में सरकारी आवास खाली करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रख दिया गया है।

Dabra प्रशासनिक मिलीभगत की उठ रही आशंका

एक साल से अधिक समय बीत जाने और बार-बार शिकायत के बावजूद सीएमओ कार्यालय द्वारा कोई ठोस कदम न उठाना कई सवाल खड़े करता है। क्या इस अवैध कब्जे को स्थानीय अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है? सरकारी संपत्ति का इस तरह दुरुपयोग नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गहरा धब्बा है। जागरूक नागरिकों ने अब प्रदेश के उच्च अधिकारियों और माननीय मुख्यमंत्री महोदय से इस भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और आवास खाली कराने की मांग की है।

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