Report by: Ishu Kumar
Fatehabad : अपनी जायज मांगों और शहीद साथियों के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे फायर ब्रिगेड कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। दमकल विभाग कार्यालय के बाहर चल रहा धरना आज 10वें दिन में प्रवेश कर गया है। 8 अप्रैल से शुरू हुई यह हड़ताल अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेती जा रही है, जिसमें कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे।

Fatehabad शहीद साथियों के परिवारों के लिए हक की लड़ाई
हड़ताल का मुख्य केंद्र उन दो जांबाज दमकल कर्मियों का बलिदान है, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान आग बुझाते समय अपनी जान गंवा दी थी। प्रदर्शनकारी कर्मचारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि:
- शहीद कर्मचारियों के आश्रितों को तुरंत सरकारी नौकरी दी जाए।
- पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा और सहायता राशि प्रदान की जाए। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की चुप्पी इन शहीदों के बलिदान का अपमान है।
Fatehabad विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया का मिला समर्थन
कांग्रेस विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया ने धरनास्थल पर पहुँचकर कर्मचारियों के प्रति एकजुटता जाहिर की। उन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं को विस्तार से सुना और उनसे ज्ञापन लिया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार किसान, मजदूर और कर्मचारियों की आवाज दबाने का काम कर रही है। विधायक ने मांग की कि सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़े और इन कोरोना योद्धाओं (दमकल कर्मियों) की मांगें तुरंत माने।
Fatehabad बढ़ता सामाजिक और राजनीतिक दबाव
जैसे-जैसे हड़ताल के दिन बीत रहे हैं, आंदोलन को विभिन्न कर्मचारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। धरनास्थल पर प्रतिदिन बढ़ती भीड़ और विभिन्न संगठनों की भागीदारी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की मांगों को अनसुना करना शहर की सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक साबित हो सकता है।
Fatehabad उग्र आंदोलन की चेतावनी
हड़ताली कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तेज करने के लिए मजबूर होंगे। आने वाले दिनों में चक्का जाम या अन्य कड़े कदम उठाए जा सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
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