Report by: Yogendra Singh
Gariaband : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में वन विभाग ने वन्यजीव अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। आधुनिक तकनीक और सतर्कता का परिचय देते हुए विभाग ने 9 भारतीय विशाल गिलहरियों (Indian Giant Squirrels) के शिकार के मामले में मुख्य आरोपी को धर दबोचा है। पकड़े गए आरोपी की पहचान दंतेवाड़ा जिले के बारसूर निवासी बंशीराम कोवासी के रूप में हुई है। यह कार्रवाई न केवल वन्यजीव प्रेमियों के लिए राहत की खबर है, बल्कि उन अपराधियों के लिए कड़ी चेतावनी भी है जो सोशल मीडिया पर अपराध का प्रदर्शन करते हैं।
Gariaband इंस्टाग्राम रील बनी काल: खुद ही सबूत दे बैठा शिकारी
यह मामला ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ की ताकत का एक बेहतरीन उदाहरण है। आरोपी बंशीराम ने 9 भारतीय विशाल गिलहरियों का बेरहमी से शिकार करने के बाद उनका एक वीडियो बनाया और उसे इंस्टाग्राम रील के रूप में अपलोड कर दिया। रील के माध्यम से वह अपनी इस अवैध करतूत का प्रदर्शन करना चाहता था, लेकिन यही वीडियो वन विभाग की पैनी नजरों में आ गया। विभाग की आईटी सेल और एंटी-पोचिंग यूनिट ने वीडियो का तकनीकी विश्लेषण किया, जिससे आरोपी की लोकेशन और पहचान सुनिश्चित हो सकी।
Gariaband छापेमारी में खुलासा: भालू की खाल और जाल बरामद
जैसे ही आरोपी की पहचान पुख्ता हुई, वन विभाग की टीमों ने उसके ठिकाने पर दबिश दी। तलाशी के दौरान अधिकारियों के होश उड़ गए जब आरोपी के घर से न केवल गिलहरियों के शिकार के साक्ष्य मिले, बल्कि भालू की खाल और वन्यजीवों को फंसाने वाले भारी मात्रा में फंदे और जाल भी बरामद किए गए। इन सबूतों से यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी कोई नौसिखिया नहीं, बल्कि एक शातिर शिकारी है जो लंबे समय से संरक्षित वन्यजीवों को निशाना बना रहा था।
Gariaband संयुक्त टीम की रणनीति: तीन इकाइयों ने मिलकर की कार्रवाई
इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए वन विभाग ने एक संयुक्त कार्यबल का गठन किया था। इसमें उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग यूनिट, राज्य उड़नदस्ता (State Flying Squad) और दंतेवाड़ा वन प्रमंडल की टीमों ने समन्वय के साथ काम किया। विभाग ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इस शिकार के पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट तो काम नहीं कर रहा है।
Gariaband वन विभाग की अपील: वन्यजीव संरक्षण में सहयोग जरूरी
इस घटना के बाद वन अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से अपील जारी की है। उन्होंने कहा कि भारतीय विशाल गिलहरी जैसे दुर्लभ जीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि वे सोशल मीडिया पर वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कंटेंट देखें या अपने आसपास अवैध शिकार की गतिविधि महसूस करें, तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग के टोल-फ्री नंबर या नजदीकी कार्यालय में दें। अधिकारियों का कहना है कि सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी।
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