Report by: Sanjeev Kumar
Bokaro : झारखंड के सरकारी खजाने में सेंधमारी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने वित्त विभाग और पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बोकारो ट्रेजरी (कोषागार) से एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर के वेतन के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह मामला तब उजागर हुआ जब प्रधान महालेखाकार (PAG) चंद्रमौली सिंह ने वित्त सचिव को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी।

Bokaro 20 महीने में 3.15 करोड़ की निकासी: वेतन या सरकारी लूट?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के नाम पर मई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच कुल 3.15 करोड़ रुपये की निकासी की गई। सामान्य तौर पर एक सब-इंस्पेक्टर का वेतन लगभग 1 लाख रुपये होता है, लेकिन इस मामले में औसतन 15 लाख रुपये प्रति माह से अधिक की राशि निकाली गई।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी रकम की निकासी पर GPF के नाम पर मात्र 61,668 रुपये की कटौती की गई, जबकि इनकम टैक्स (आयकर) और TDS के मद में एक रुपया भी नहीं काटा गया। सिस्टम में धांधली का आलम यह था कि सब-इंस्पेक्टर का पे-लेवल 7वें वेतन आयोग के लेवल-18 के बराबर दिखाया गया, जो तकनीकी रूप से किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए असंभव है।
Bokaro कंट्रोल गैप और सिस्टम की खामियां उजागर
PAG की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ट्रेजरी के निरीक्षण और डेटा विश्लेषण के दौरान पेरोल प्रोसेसिंग और वेतन निर्धारण (Pay Entitlement) में गंभीर ‘कंट्रोल गैप’ पाए गए हैं।
- दोहरी निकासी का संदेह: आशंका जताई जा रही है कि न केवल बोकारो बल्कि अन्य कोषागारों में भी एक ही अवधि का वेतन दो बार निकाला गया है।
- वैलिडेशन फेलियर: सिस्टम में डेटा वैलिडेशन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी तरह विफल रही, जिसके कारण इतनी बड़ी राशि बिना किसी रोक-टोक के निकलती रही। इस पूरे प्रकरण पर जब ट्रेजरी ऑफिसर गुलाब चंद्र उरांव से संपर्क किया गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली और केवल इतना कहा कि मामले की जांच चल रही है।
Bokaro एसपी का बयान: 2016 में ही रिटायर हो चुका है ‘उपेंद्र सिंह’
इस मामले में बोकारो एसपी हरविंदर सिंह का बयान काफी अहम है। उन्होंने रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए बताया कि जिला पुलिस के स्तर पर कोई गड़बड़ी नहीं मिली है।
- रिटायरमेंट का खुलासा: एसपी के अनुसार, जिस उपेंद्र सिंह के नाम पर यह खेल हुआ है, वह व्यक्ति 2016 में ही पुलिस सेवा से रिटायर हो चुका है।
- ऑडिट रिपोर्ट: उन्होंने यह भी बताया कि फरवरी महीने में ऑडिट कराया गया था, जिसमें कोई भी वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई थी। वर्तमान में इस नाम के अन्य कर्मियों के बैंक खातों की भी जांच की गई है, लेकिन वहां कोई संदिग्ध लेन-देन नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि पुलिस रिकॉर्ड में सब ठीक है, तो ट्रेजरी के डेटा में करोड़ों की यह एंट्री कहाँ से और किसके माध्यम से हुई?
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