BY: Yoganand Shrivastva
दिल्ली पुलिस ने देशभर के संस्थानों, उच्च न्यायालयों और सरकारी दफ्तरों की नींद उड़ाने वाले एक शातिर शख्स को कर्नाटक से गिरफ्तार किया है। 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस की गिरफ्तारी के बाद जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति, जो कभी छात्रों को भविष्य संवारने की राह दिखाता था, वह देश के सिस्टम के लिए सिरदर्द कैसे बन गया? आइए जानते हैं पूरा मामला।
प्रतिशोध की आग: आखिर क्यों चुना अपराध का रास्ता?
पूछताछ के दौरान लुईस ने बताया कि उसकी इस सनक के पीछे कोई आतंकी संगठन नहीं, बल्कि व्यक्तिगत नाराजगी थी।
- जमीन विवाद: कर्नाटक के मैसूरु में उसका एक पुराना जमीनी विवाद चल रहा था। लुईस का आरोप है कि उसके पिता को उनका वाजिब हक नहीं मिल रहा था।
- न्यायपालिका से नाराजगी: इसी विवाद के चलते उसने कानून की पढ़ाई करने का भी मन बनाया था। उसे लगा कि अदालतें उसे न्याय नहीं दे रही हैं, जिससे आहत होकर उसने अदालतों और सरकारी तंत्र को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया।
असिस्टेंट प्रोफेसर और NET क्वालीफाइड: चौंकाने वाला बैकग्राउंड
श्रीनिवास लुईस कोई साधारण अपराधी नहीं है। उसका शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है:
- वह NET (National Eligibility Test) क्वालीफाई कर चुका है और एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्य कर चुका है।
- गिरफ्तारी के वक्त वह अपनी मां के साथ कर्नाटक में रह रहा था।
- लुईस तकनीकी रूप से भी काफी सक्षम था; वह अपना IP एड्रेस छिपाने में माहिर था ताकि पुलिस उस तक न पहुँच सके। पकड़े जाने के डर से वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था।
3. सुप्रीम कोर्ट से लेकर पाकिस्तान तक भेजे ईमेल
दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि लुईस की पहुंच और हिमाकत काफी बढ़ गई थी:
- उसने केवल स्कूलों या अस्पतालों को ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और कई राज्यों के हाई कोर्ट्स को भी बम से उड़ाने की धमकियां दीं।
- पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसने कुछ ईमेल पाकिस्तान के शहरों में भी भेजे थे।
- लुईस ने इनमें से अधिकांश धमकियां अपने मोबाइल फोन के जरिए भेजी थीं। फिलहाल दिल्ली पुलिस की एक टीम फोन बरामद करने के लिए मैसूरु रवाना हो गई है और आरोपी 6 दिन की रिमांड पर है।
