BY: Yoganand Shrivastva
मशहूर उद्योगपति अनिल अंबानी एक बार फिर कानूनी शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom), इसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में नई FIR दर्ज की है।
क्या है पूरा मामला? 4500 करोड़ के निवेश का गणित
यह पूरा विवाद LIC द्वारा रिलायंस कम्युनिकेशंस में किए गए भारी-भरकम निवेश से जुड़ा है। सीबीआई की शुरुआती जांच के अनुसार:
- निवेश की अवधि: LIC ने RCom द्वारा जारी किए गए सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में कुल 4500 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
- कब लगा पैसा: इसमें से 3000 करोड़ रुपये साल 2009 में और शेष 1500 करोड़ रुपये साल 2012 में निवेश किए गए थे।
- बकाया राशि: आरोप है कि इस निवेश में से अब तक 3750 करोड़ रुपये की राशि बकाया है, जिससे LIC को भारी आर्थिक चपत लगी है।
FIR के पीछे के मुख्य आरोप और शिकायत
CBI ने यह मामला LIC के रीजनल मैनेजर (लीगल) मनोज कुमार तेजन की औपचारिक शिकायत के आधार पर दर्ज किया है।
- धोखाधड़ी का आरोप: FIR में कहा गया है कि निवेश की प्रक्रिया के दौरान जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई और गड़बड़ी की गई ताकि सरकारी संस्थान (LIC) को नुकसान पहुँचाया जा सके।
- साजिश: आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस के प्रबंधन ने गुमराह करने वाली जानकारी देकर यह निवेश हासिल किया और बाद में भुगतान में चूक की।
सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह
CBI को शक है कि इस घोटाले के पीछे केवल कंपनी का प्रबंधन ही नहीं, बल्कि कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
- जांच एजेंसी अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या निवेश की मंजूरी देते समय किसी पद का दुरुपयोग किया गया था।
- आने वाले दिनों में अनिल अंबानी और कंपनी के अन्य पूर्व निदेशकों से इस भारी नुकसान के संबंध में कड़ी पूछताछ की जा सकती है।
