Bhopal : सात दिनों तक चले “महर्षि विश्व शांति समागम” का शनिवार को समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के समागम में देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशों से आए आध्यात्मिक साधकों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महर्षि जी के शांति सूत्रों के माध्यम से वैश्विक अशांति और तनाव को कम करने की दिशा में ठोस प्रयास करना था।
ब्रह्मचारी गिरीश जी का संबोधन: शांति के लिए 10,000 साधकों का आह्वान
Bhopal महर्षि शैक्षणिक संस्थान समूह के अध्यक्ष और वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी गिरीश जी ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और देशों के बीच जारी युद्धों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारों ने महर्षि जी द्वारा दिए गए स्थायी शांति के सूत्रों को समझने में देरी की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- सामूहिक चेतना की शक्ति: जिस प्रकार सागर बूंदों से भरता है, उसी प्रकार साधकों की छोटी संख्या भी विश्व की सामूहिक चेतना पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालती है।
- शांति का फॉर्मूला: ब्रह्मचारी गिरीश जी के अनुसार, यदि भारत में 10,000 साधकों का एक समूह नियमित रूप से योगिक अभ्यास और ध्यान करे, तो पूरे विश्व की चेतना में सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है, जिससे युद्ध की विभीषिका को टाला जा सकता है।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव: ध्यान से व्यक्तिगत और वैश्विक बदलाव
Bhopal समारोह में शिक्षा और आध्यात्मिकता से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार रखे। महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. भुवेश शर्मा, कार्यकारी निदेशक डॉ. पी.सी. जोशी, और जनसंपर्क निदेशक श्री वी.आर. खरे ने सामूहिक ध्यान के वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों का मानना था कि जब बड़ी संख्या में लोग एक साथ बैठकर शांति का संकल्प लेते हैं, तो उसका प्रभाव केवल उनके स्वयं के स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि आसपास के वातावरण और राष्ट्रों के संबंधों पर भी पड़ता है। संयुक्त निदेशक श्रीमती आर्य नंद कुमार ने भी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए योगिक जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया।
सम्मान और संकल्प: आगामी वर्षों में निरंतरता की उम्मीद
Bhopal समापन समारोह के अंत में सभी प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय सहभागिता के लिए प्रमाण पत्र, पुष्प और मिष्ठान भेंट कर सम्मानित किया गया। सात दिनों तक चले इस शिविर के बाद प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे इन सात दिनों ने उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव लाए हैं।
सभी उपस्थित जनों ने एक स्वर में मांग की कि इस तरह के शांति समागमों का आयोजन नियमित रूप से होना चाहिए ताकि नई पीढ़ी को वैदिक ज्ञान और शांति की संस्कृति से जोड़ा जा सके।
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