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New Delhi : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, ईरान ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने हालिया बयान में स्पष्ट किया है कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) भारत जैसे मित्र देशों के लिए पूरी तरह खुला और सुरक्षित है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापारिक मार्गों पर असुरक्षा के बादल मंडरा रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्री ने भारत को एक विश्वसनीय साझेदार बताते हुए क्षेत्रीय स्थिरता में उसके योगदान की सराहना की है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सामरिक महत्ता और ईरान का रुख

New Delhi होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट्स’ में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे इस मार्ग पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान करती है। विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सुरक्षा उन राष्ट्रों के लिए सुनिश्चित है जो ईरान की संप्रभुता का सम्मान करते हैं और मित्र राष्ट्रों की श्रेणी में आते हैं।

ईरान ने बार-बार कहा है कि विदेशी सैन्य हस्तक्षेप क्षेत्र की शांति के लिए खतरा है। हालांकि, भारत के साथ अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए, अराघची ने आश्वस्त किया कि भारतीय व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति को इस मार्ग से कोई बाधा नहीं आएगी। यह बयान भारत के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से इसी मार्ग के जरिए आयात करता है।

भारत-ईरान संबंध: चाबहार पोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा

New Delhi ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान केवल समुद्री मार्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और ईरान के बीच गहराते रणनीतिक संबंधों का प्रतिबिंब है। चाबहार बंदरगाह का विकास दोनों देशों के बीच सहयोग का एक जीवंत उदाहरण है, जो न केवल भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच प्रदान करता है, बल्कि पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए एक नया व्यापारिक गलियारा भी बनाता है।

अराघची ने संकेत दिया कि ईरान भारत को एक ऐसी उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है जो संतुलित विदेश नीति का पालन करती है। होर्मुज जलडमरूमध्य को भारत के लिए खुला रखना न केवल द्विपक्षीय व्यापार के लिए जरूरी है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति को भी सुनिश्चित करता है। ईरान का यह रुख दर्शाता है कि वह पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत जैसे एशियाई देशों के साथ अपने आर्थिक और सामरिक हितों को मजबूत करना चाहता है।

क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार पर प्रभाव

New Delhi पश्चिम एशिया (Mid-East) में मौजूदा संघर्षों और इजरायल-हमास युद्ध के बाद उपजे तनाव ने समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं। ऐसे में ईरान के विदेश मंत्री का यह बयान वैश्विक बाजारों को शांत करने की एक कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई भी व्यवधान आता है, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।

ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने का पक्षधर है, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसके जायज हितों को समझे। भारत के लिए, ईरान का यह ‘मित्र राष्ट्र’ वाला दर्जा उसकी ‘एक्ट वेस्ट’ (Act West) नीति की एक बड़ी सफलता है। आने वाले समय में, होर्मुज मार्ग की सुरक्षा और चाबहार का विस्तार भारत-ईरान संबंधों को एक नई ऊँचाई पर ले जा सकता है, जो पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की आर्थिक तस्वीर बदल देगा।

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